स्वयं सहायता समूह के नाम पर लिए ऋण की किस्तें न चुकाने पर कोर्ट का फैसला
सलूणी क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह बनाकर 29 जून 2006 को लिया था बैंक से ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। विधानसभा क्षेत्र डलहौजी के अधीन आने वाले परिक्षेत्र में स्वयं सहायता समूह के नाम पर ऋण लेकर किस्तें न चुकाना स्वयं सहायता समूह के पदाधिकारियों को भारी पड़ा है।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी चंबा पार्थ जैन की अदालत ने स्वयं सहायता समूह के पदाधिकारियों को 3,22,613 रुपये 10 प्रतिशत ब्याज दर समेत किस्तें चुकाने के आदेश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार सलूणी क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह गठित कर 29 जून 2006 को बैंक से सब्जी उगाकर आजीविका कमाने के उद्देश्य से 4,30,000 रुपये ऋण के लिए आवेदन किया। स्वयं सहायता समूह की ओर से पदाधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद उनका 4,30,000 रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। कुछ समय तक ऋण की किस्तें चुकाने के बाद किस्तों की अदायगी करनी बंद कर दी गई। इसके बाद 2 मई 2009 से 9 फरवरी 2012 और 27 नवंबर 2024 तक ऋण को आगे बढ़ाने का पत्र दायर किया। इसे अनुमति दे दी गई। स्वयं सहायता समूह के पदाधिकारियों ने 27 अक्तूबर 2013 को बैंक को 2,43,645 रुपये अदा करने थे। इसके अलावा 20 अक्तूबर 2013 से 31 मई 2015 तक ब्याज के रूप में 78,968 रुपये अदा करना शेष हुआ। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों की ओर से बैंक को 3,22,613 रुपये देना शेष रहा। बैंक की किस्तें चुकता न करने पर स्वयं सहायता समूह को एक नोटिस जारी किया गया लेकिन ऋण धारक ने न तो नोटिस का उत्तर दिया और न ही भुगतान किया। इसके बाद आखिरकार बैंक प्रबंधन की ओर से न्यायालय में याचिका दायर की। अदालत ने ऋण धारक के खिलाफ सबूतों और गवाह को ध्यान में रखते हुए ऋण धारक को 3,22,613 रुपये 10 प्रतिशत सालाना ब्याज दर से अदा करने के निर्देश दिए हैं।