तड़ग्रा में पुल न होने के घरूरू में रावी नदी पार करते बच्चे।
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जिला मुख्यालय से करीब चार किमी की दूरी पर स्थित तडग़्रां वासियों को जान जोखिम में डाल घरूरू के रास्ते रावी नदी को पार करना पड़ रहा है। वर्ष 1995 में आई बाढ़ के बाद तडग़्रां वासियों का पैदल रास्ता भारी भूस्खलन के कारण ढह गया था। जहां पर दोबारा रास्ते का निर्माण नहीं किया जा सका।
इसके बाद सरकार व प्रशासन से लगातार मांग करने बाद उनके लिए रावी नदी के पर एक रोपवे (घरूरू) का निर्माण किया गया था। तब से लेकर आज तक तड़ग्रां के लोग घरूरू के रास्ते ही रावी नदी को पार कर रहे हैं। कई बार घरूरू खराब होने के वजह से छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। परंतु उसके बाद भी तड़ग्रां के लोगों के लिए पैदल पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। स्थानीय निवासी ओमकार सिंह, एन सिंह, प्यार सिंह, सन्नी, बबलू, अशोक कुमार, सोनू, बलदेव कुमार, पुन्नू राम व संजय कुमार ने बताया कि रावी नदी का जलस्तर कम होने के बाद ग्रामीण रावी नदी के बीच से आवाजाही करते हैं। ऐसे में कोई अप्रिय घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को घरूरू के रास्ते आवाजाही करने में भारी दिक्कतें पेश आती हैं। घरूरू में कई बार स्कूली बच्चे रावी नदी को पार करते समय फंस चुके हैं। जिसे स्थानीय लोगों व अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बचाया गया था। तड़ग्रां निवासी काफी समय से सरकार व प्रशासन से तडग़्रां के लिए पैदल पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं परंतु हर बार उन्हें केवल आश्वासन के सिवा कुछ भी हाथ नहीं लगता।