मेडिकल कॉलेज की उम्मीद और चंबा के लाखों लोगों का सपना टूट गया है। स्टाफ और अन्य जरूरतें पूरी न हो पाने की दुहाई देकर स्वास्थ्य निदेशालय व सरकार ने चंबा मेडिकल कॉलेज को अपनी प्राथमिकता से अलग कर दिया है। अब सबका ध्यान सिर्फ नाहन पर केंद्रित है जहां इसी साल अगस्त से नया बैच बैठेगा।
मेडिकल एजूकेशन निदेशालय ने साफ कर दिया है कि कम से कम इस सत्र से चंबा में मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही उन सारी तैयारियों को भी जबरदस्त झटका लगा है जिनके बूते प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चंबा की स्वयंसेवी संस्थाएं यहां के लोगों की बेहतरी का सपना देख रही थी। स्वास्थ्य विभाग ने धरातल पर मेडिकल कॉलेज को लेकर खूब अभ्यास किया था। पहले पशु पालन विभाग से जमीन हासिल करने और फिर वैकल्पिक तौर पर कॉलेज शुरू करने को लेकर चंबा के अखंड चंडी पैलेस को तय किया गया।
प्रशिक्षु डॉक्टरों और स्टाफ के लिए आवास तक तय कर दिए गए थे। लेकिन ऐन मौके पर निदेशालय ने सबको झटका देते हुए इस सत्र से कॉलेज न चलाने का निर्णय सुना दिया है। चंबा जिला के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से भटियात को छोड़ दिया जाए तो डलहौजी, तीसा, भरमौर और चंबा सभी उपचार के लिए मुख्यालय पर निर्भर हैं और यहां की घनी आबादी मेडिकल कॉलेज का लाभ मिलना था।
क्यों महसूस हो रही थी जरूरत
चंबा में सबसे ज्यादा लोगों की मौत सड़क हादसों में होती है। यहां साल में औसतन सौ से अधिक लोग हादसों में मरते हैं। चंबा में न तो ट्रामा सेंटर है और न ही दूसरी कोई सुविधा। मरहम पट्टी के बाद घायल टांडा रेफर किए जाते हैं लेकिन चंबा से टांडा की दूरी चार घंटे की है और अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही इनमें से कइयों की मौत हो जाती है।
चंबा को करना होगा इंतजार : निदेशक
मेडिकल एजूकेशन निदेशक एसएस कौशल का कहना है कि चंबा में मेडिकल कॉलेज की संभावना नहीं है। इस सत्र से सिर्फ नाहन में ही मेडिकल कॉलेज चलेगा। चंबा को मेडिकल कॉलेज के लिए अभी और इंतजार करना होगा। इस वक्त पूरा ध्यान नाहन पर केंद्रित है।