स्वस्थ व सुरक्षित मणिमहेश यात्रा का सपना टूट चुका है। मणिमहेश में सिलसिलेवार अब तक सात मौतें हुई हैं और यह सभी ऐसी जगह हुई जहां प्रशासन ने स्वास्थ्य शिविरों के प्रबंध कर रखे थे।
इतना ही नहीं किसी का स्वास्थ्य खराब होने और चिकित्सकों की सलाह मिलने के बाद मरीजों को हेली टैक्सी सेवा मुहैया करवाने का प्रबंध भी किया गया था। इसके बावजूद मणिमहेश यात्रियों को बचाया नहीं जा सका। मणिमहेश के लिए भरमौर से गौरीकुंड तक उड़ान हो रही है। गौरीकुंड में ही स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया है। यहां स्वास्थ्य विभाग ने ईसीजी की सुविधा समेत जीवनरक्षक दवाएं मुहैया करवाने की बात कही थी। लेकिन शनिवार और रविवार के बीच में मरे तीनों श्रद्धालुओं ने गौरीकुंड में अपना चेकअप करवाया था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि मारे गए श्रद्धालुओं में शुगर व हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण पाए गए थे।
ऐसे में उतार-चढ़ाव भरे मणिमहेश के तापमान में खुद को न ढाल पाने की वजह से उनकी मौत हो गई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि पहले से बीमार श्रद्धालुओं को प्रशासन ने मणिमहेश की चढ़ाई चढ़ने की इजाजत कैसे दे दी। हड़सर से डल झील तक चढ़ाई के दौरान स्वास्थ्य शिविर में तीनों श्रद्धालुओं को कहीं पर भी दवा लेने की जरूरत महसूस नहीं हुई। जबकि उतरते वक्त यह तीनों आसानी से नीचे आ सकते थे। इतना ही नहीं जब श्रद्धालुओं ने गौरीकुंड में अपना चेकअप करवाया तो उनकी जान जोखिम में होने के बावजूद उन्हें नीचे उतरने की इजाजत क्यों दे दी गई। बहरहाल, मणिमहेश यात्रा अभी नौ सितंबर तक जारी रहेगी और आने वाले समय में प्रशासन इस यात्रा को विकराल रूप देने की भी कोशिश कर रहा है। लेकिन जब तक यात्रियों की सुविधा के लिए मेडिकल परीक्षण का प्रबंध नहीं हो पाएगा श्रद्धालुओं की जान का जोखिम ऐसे ही बना रहेगा।
अगले साल से होगा स्वास्थ्य परीक्षण : एडीएम
उधर, अतिरिक्त दंडाधिकारी भरमौर विनय धीमान का कहना है कि यात्रियों को बार-बार बीमारी की हालत में यात्रा न करने के लिए अवगत करवाया गया है। लेकिन इसके बावजूद कुछ यात्री मणिमहेश जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले साल से बिना स्वास्थ्य जांच के किसी भी यात्री को मणिमहेश जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।