चंबा। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों एवं शिल्पकारों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योजना है। इससे जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। यह बात उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने उद्यमिता एवं विपणन सहायता पर आयोजित एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला में कही।
सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी संभव है, जब पात्र व्यक्ति उनमें सक्रिय रूप से भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने एमएसएमई के विभागीय अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि सोलन में कार्यालय होने के बावजूद विभाग द्वारा प्रदेश के दूरस्थ जिलों तक पहुंच बनाकर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का मुख्य उद्देश्य परंपरागत कला एवं हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को उनकी पुश्तैनी कला के माध्यम से सतत आजीविका प्रदान करना है। वर्तमान में जिला चंबा से लगभग 1450 कारीगर इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हुए हैं। लाभार्थियों को एक लाख तक का बिना गारंटी ऋण मात्र 5 प्रतिशत ब्याज की दर पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस योजना को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखें, बल्कि इसे आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और पारंपरिक कलाओं के पुनर्जीवन का माध्यम बनाएं।