तीसा (चंबा)। चंबा जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर बौंदेड़ी पंचायत के मांडून गांव के 32 परिवार खतरे के साये में जीने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में तो अकसर यहां के लोगों की रातों की नींद भी हराम हो जाती है, क्योंकि गांव भूस्खलन की जद में आ चुका है। इसलिए बरसात होने पर भूस्खलन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। गांव भूस्खलन वाले स्थान से थोड़ी दूरी पर ही है। ऐसे में हल्की सी आवाज होने पर गांव के लोगों के नींद उड़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी पूरा गांव भूस्खलन की जद में आ सकता है। ग्रामीणों ने गांव को भूस्खलन की जद में आने से बचाने के लिए मुख्यमंत्री व प्रशासन से गुहार लगाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव को भूस्खलन से बचाने की दिशा में अभी तक कोई भी कारगर प्रयास नहीं किए गए हैं। जिसको लेकर लोगों में भारी रोष है। समय रहते गांव को भूस्खलन से बचाने के उचित प्रबंध नहीं किए गए तो आने वाले समय में इसके भीषण परिणाम देखने को मिलेंगे। भूस्खलन का दायरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। जिससे गांव कभी भी भूस्खलन की जद में आ सकता है। जहां भूस्खलन हो रहा है ठीक उसके नीचे एक निजी प्रोजेक्ट का काम चला हुआ है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि उनकी समस्या का जल्द हल किया जाए
एसडीएम मनीष चौधरी ने बताया कि उन्होंने पिछले सप्ताह उपरोक्त गांव का निरीक्षण किया था। गांव को भूस्खलन से बचाने के लिए बीडीओ को मनरेगा के तहत क्रेट वर्क करने को कहा गया है। गांव को सुरक्षित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।