नौकरी ठुकराई, जनसेवा चुनी, लगातार प्रमुुखता से उठा रहे हैं क्षेत्र की समस्याएं
पर्यावरण संरक्षण से लेकर ग्रामीणों की समस्याओं तक उठाते रहे आवाज
सेवानिवृत्ति के बाद भी ओंकार चौहान बने लोगों की मदद का सहारा
शशि धीमान।
सिहुंता (चंबा)। नौकरी के अवसर सामने होने के बावजूद व्यक्तिगत लाभ के बजाय समाज और पर्यावरण की सेवा को प्राथमिकता देना हर किसी के लिए आसान नहीं होता।
कामला पंचायत के वरिष्ठ नागरिक कुलभूषण उपमन्यु ने इसी राह को चुना। करीब 70 वर्ष की उम्र में भी उनका जनसेवा का जज्बा कायम है और वह क्षेत्र की समस्याओं को लगातार प्रमुखता से उठाते आ रहे हैं।
कुलभूषण उपमन्यु ने अपने माता-पिता के साथ जंगलों के संरक्षण से जनसेवा की शुरुआत की। उन्होंने चौड़ी पत्तियों वाले स्थानीय पेड़-पौधों को बढ़ावा देने की जरूरत को लगातार उठाया और इस विषय को सरकार के समक्ष भी रखा। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े चिपको आंदोलन से भी उनका जुड़ाव रहा। उनका जोर चीड़ और सफेदा के बढ़ते प्रभाव को कम करने के साथ ऐसे पेड़ लगाने पर रहा, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीणों के लिए चारे की जरूरत भी पूरी कर सकें।
किसानों को सिंचाई और पानी की सुविधा दिलाने के लिए भी उन्होंने संबंधित विभागों के समक्ष आवाज उठाई। परिवार में राजनीतिक और सरकारी प्रभाव होने के बावजूद उन्होंने नौकरी या व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता नहीं दी। उनके भाई शिक्षा मंत्री रहे, लेकिन कुलभूषण ने लोगों के बीच रहकर काम करना चुना।
वहीं, सिहुंता पंचायत के वरिष्ठ नागरिक एवं सेवानिवृत्त कानूनगो ओंकार चौहान भी सेवानिवृत्ति के बाद लोगों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय हैं। पेंशन, बिजली, पानी, बस सुविधा और आर्थिक परेशानियों से जुड़े मामलों को वह संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते हैं। साथ ही ग्रामीणों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी देते हैं।