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Chamba News: खौउल उत्सव...मशाल जलाकर बुरी शक्तियां भगाने की परंपरा निभाई

Mon, 02 Feb 2026 10:50 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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बुरी श​क्तियों को भगाने को पांगी में खौउल उत्सव मनाते पांगीवासी। जागरूक पाठक
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पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी अपनी अनूठी संस्कृति के लिए पूरे प्रदेश भर में मशहूर हैं। बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच पांगी में ऐतिहासिक खौउल उत्सव का रविवार रात को आगाज हुआ। स्थानीय भाषा में इसे चजगी भी कहा जाता है। इस दौरान मशाल जलाकर बुरी शक्तियां भगाए जाने की परंपरा निभाई।
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जहां एक तरफ पूरी घाटी बर्फ की सफेद चादर में लिपटी हुई है, वहीं दूसरी तरफ अब पांगी में त्योहारी सीजन शुरू हुआ है। खौउल उत्सव मनाने के पीछे एक बेहद दिलचस्प और पुरानी मान्यता भी जुड़ी है। पांगी के बुजुर्ग बताते हैं कि सर्दियों के दिनों में घाटी में बुरी शक्तियों या राक्षसों का राज हो जाता है। इन्हीं बुरी शक्तियों को अपने क्षेत्र से खदेड़ने के लिए यह त्योहार मनाया जाता है।
पांगी की अलग-अलग पंचायतों में लोगों ने विशेष पूजा के बाद अपने घरों से जलती हुई मशालें निकालीं। माना जाता है कि मशाल के आग की रोशनी से बुरी आत्माएं भाग जाती हैं। इस दौरान लोगों ने अपने पूर्वजों को भी याद कर सुख-समृद्धि की कामना की है।
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पांगी घाटी में इस त्योहार को अलग-अलग तिथियों में मनाया जाता है। इस उत्सव का आगाज सबसे पहले जम्मू बॉर्डर के साथ लगते पांगी के आखिरी गांव सुराल से हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे यह जश्न पूरी घाटी में मनाया जाता है। सुराल, धरवास, लुज में इस उत्सव को एक माह पहले मना लिया गया है। वहीं, अब मुख्यालय किलाड़, मिंधल, साच, कुमार, परमार, फिंडरू और कुलाल जैसे गांव में खौउल उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। हर गांव के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर इस उत्सव को मनाते हैं। उधर, पांगी भरमौर विधानसभा के विधायक डॉ. जनक राज ने सभी पांगीवासियों को खौउल उत्सव की बधाई दी है।
15 दिन बाद शुरू होगा जुकारू उत्सव
साच पंच नाग देवता के गुर इंद्र सिंह ने बताया कि खौउल उत्सव की शुरुआत 15 दिन बाद पांगी का सबसे बड़ा त्योहार जुकारू पर्व शुरू होगा, जिसका इंतजार हर पांगीवासी को साल भर रहता है। फिलहाल, खौउल के मौके पर घाटी में दावत का दौर जारी है। हर घर में मंडे, हलवा, पूरी, चावल, कढ़ी और दाल जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जा रहे हैं।
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