उपमंडल की सलूणी पंचायत के देवगाह गांव में लगभग ग्यारह बच्चों में पीलिया के लक्षण सामने आए हैं। इनमें एक चौदह वर्षीय बच्ची को आगामी उपचार के लिए टीएमसी भी रेफर किया गया है। जबकि बाकी बच्चों का इलाज उनके परिजन घर में ही करवा रहे हैं।
जिसका कारण सलूणी में नियुक्त चिकित्सक का अवकाश पर रहना बताया जा रहा है। ऐसे में यह समस्या गंभीर बनती जा रही है। इन बच्चों के परिजनों ने बताया कि बच्चों की आंखों और नाखुनों में पीलापन आ गया है। वहीं बच्चों को भूख न लगने से उनकी हालत भी काफी कमजोर हो गई है। परिजनों में से पवन कुमार, शिव कुमार, सुनील कुमार, राजिंद्र कुमार, मुकेश व कुलदीप ने बताया कि जिस बच्ची को टीएमसी रेफर किया गया है। उसी की तरह बाकी बच्चों में भी लक्षण पाए गए हैं।
पिछले एक सप्ताह से बच्चे स्कूल भी नहीं जा पाए हैं। जिन बच्चों में इसके लक्षण सामने आए हैं उनकी उम्र छह से चौदह वर्ष के बीच है। जिससे स्पष्ट रूप से पता चल रहा है कि बच्चों को पीलिया है। उधर इस मामले से बेखबर स्वास्थ्य विभाग केवल चैन की नींद सोया हुआ है। परिजनों ने बताया कि सलूणी में चिकित्सक न होने से उन्होंने कोटि स्थिति एक क्लीनिक में अपने बच्चों की स्वास्थ्य जांच करवाई है। जहां से बच्चों को पीलिया होने की पुष्टि हुई है। लिहाजा सभी सलूणी में चिकित्सक के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं ताकि बच्चों का आगामी उपचार शुरू करवा सकें।
स्वास्थ्य खंड सलूणी के कार्यकारी बीएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में शीघ्र स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजा जाएगा ताकि पीलिया ग्रस्त बच्चों का सही उपचार करवाया जा सके। इसके अलावा सभी लोग दूषित पानी का सेवन करने से बचें। अपने आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। क्योंकि इसी से यह रोग फैलता है।