चुराह घाटी के मलवास गांव में शुक्रवार आधी रात बादल फटने के बाद अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान मैहलवार धार किनारे रह रहे लोगों ने बादल फटने की आवाज सुनकर एक दूसरे को अलर्ट करते हुए किसी तरह भाग कर जान बचाई। इसमें तीन परिवारों के लोग बेघर हो गए हैं। इस कारण तीनों परिवारों के लोगों को अपने पड़ोसियों के घर सिर छिपाना पड़ रहा है।
मलवास गांव के सामने लगती मैहलवार धार में शुक्रवार रात बादल फटने से मलवास नाला उफान पर आ गया। इस दौरान अथाह जल और मलबा सीधे मलवास गांव में आ गया। इस आपदा से पूरी तरह धवस्त हुए तीन मकानों के मालिकों में जय सिंह, तेज लाल व भुंजल ने बताया कि उन्होंने मेहनत की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर हाल ही में अपने घरों का निर्माण किया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनके पसीने की कमाई को पानी और मलबा बहा कर ले जाएगा।
यह सब कुछ इतना जल्द हो गया कि उन्हें अपने घरों से आवश्यक सामान भी निकालने का भी समय भी नहीं मिला। नतीजतन उनके पास न तो खाने के लिए कुछ बचा है न ही सिर छिपाने के लिए जगह। उनका जो कुछ भी था घरों में ही रखा हुआ था जो मलबा अपने साथ बहा ले गया। ऐसे में ग्रामीणों की संवेदना और प्रशासन की फौरी राहत पर ही उनकी जिंदगी चलेगी।
इस आपदा को देखकर मलवास गांव के लोग डर के साये में है। उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि जिस मलवास नाले में पानी की आपूर्ति देख उन्होंने यहां पर अपनी बस्ती बसाई थी, लेकिन नाले में बादल फटने से जिंदगी भर न भरने वाले जख्म दे गया। मौजूदा समय में पूरे गांव में दशहत का माहौल।
उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने बताया कि प्रशासन की ओर से प्रभावितों को हर संभव सहायता की जाएगी। इसके लिए नायब तहसीलदार तीसा प्रकाश चंद नरयाल को पूरी जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। जबकि इस नाले के आसपास जिन लोगों के घर हैं वह बरसात के दिनों में काफी एहतियात बरते। क्योंकि कोई भी आपदा किसी को बता कर नहीं आती है। लिहाजा सावधानी में ही सुरक्षा निहित है।