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बीबीएमबी पर सुप्रीम फैसला: हिमाचल को 20 साल में मिलेगी 1,197.3 करोड़ यूनिट बिजली, करोड़ों की आय होगी

Fri, 06 Nov 2026 11:41 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीबीएमबी की परियोजनाओं से जुड़े बिजली बकाया विवाद का निपटारा करते हुए पंजाब और हरियाणा को हिमाचल के हिस्से की 1,197.3 करोड़ यूनिट बिजली अगले 20 वर्षों में देने का आदेश दिया है।

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बीएमबी मामले में हिमाचल की बड़ी जीत! - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) पर हिस्से के लिए 1966 से चल रही लड़ाई पर आखिरकार हिमाचल प्रदेश ने जीत ली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीबीएमबी की परियोजनाओं से जुड़े बिजली बकाया विवाद का निपटारा करते हुए पंजाब और हरियाणा को हिमाचल के हिस्से की 1,197.3 करोड़ यूनिट बिजली अगले 20 वर्षों में देने का आदेश दिया है। इसमें 60 फीसदी पंजाब और 40 फीसदी हरियाणा देगा। इससे हिमाचल को हर साल औसतन करीब 59.865 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश को सालाना करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आय होगी।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसमें बिजली के बकाया भुगतान को नकद के बजाय बिजली के रूप में ही करने की बात कही गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए फैसले के अनुसार होगी। उस फैसले में बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल का हिस्सा 7.19 प्रतिशत तय हुआ था।

एक नवंबर 2011 के बाद बीबीएमबी हिमाचल प्रदेश को उसकी 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के अनुसार बिजली दे रहा है, लेकिन साल 1966 से लेकर 2010 तक की अवधि का बकाया पंजाब और हरियाणा ने अभी तक नहीं दिया था। यह 44 साल का बकाया 1,306.6 करोड़ यूनिट बिजली बनता है। इसी बकाये को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है। बकाया बिजली के भुगतान की अवधि को लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। केंद्र ने पहले 15 वर्षों में भुगतान का प्रस्ताव दिया था। पंजाब ने इसका विरोध करते हुए 30 साल मांगे थे, जबकि हिमाचल सरकार चाहती थी कि उसे 10 साल पूरा बकाया मिले। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अवधि 20 साल तय कर दी।
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1,306.6 करोड़ यूनिट बिजली था हिमाचल का मूल बकाया
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने हिमाचल प्रदेश के बिजली बकाये की गणना 1,306.6 करोड़ यूनिट की थी। हालांकि, बांधों के निर्माण में हुए खर्च के करीब 420 करोड़ के समायोजन को भी समझौते में शामिल किया है। इसके बाद हिमाचल को 1,197.30 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इस व्यवस्था में पंजाब और हरियाणा को हिमाचल प्रदेश अलग से कोई भुगतान नहीं करेगा।

बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल का 7.19 प्रतिशत हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 के फैसले में बीबीएमबी परियोजनाओं में बिजली का हिस्सा तय किया था। इसके तहत हिमाचल को 7.19 प्रतिशत, पंजाब को 51.80, हरियाणा को 37.51 और चंडीगढ़ का हिस्सा 3.50 प्रतिशत तय किया था। राजस्थान का हिस्सा लगभग पहले जैसा था। फैसले के अनुसार हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा परियोजना में एक नवंबर 1966, डैहर परियोजना में नवंबर 1977 और पौंग बांध परियोजना में जनवरी 1978 से बिजली का हिस्सा मिलना था।
 

1996 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था हिमाचल
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के बाद परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर पंजाब और हिमाचल के बीच विवाद शुरू हुआ था। समाधान नहीं निकलने पर हिमाचल सरकार ने वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। राज्य ने मांग की थी कि उत्तराधिकारी राज्य होने के नाते उसे बीबीएमबी की परियोजनाओं में 7.19 प्रतिशत हिस्सा दिया जाए। केंद्र की आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के प्रयास सफल नहीं हुए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर 2011 को हिमाचल प्रदेश के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बावजूद वर्ष 1966 से 2011 तक के बिजली बकाये का भुगतान नहीं हो पाया था।

बीबीएमबी की लड़ाई जीते, अब शानन, वाटर सेस और चंडीगढ के लिए भी लड़ेंगे : सुक्खू
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े एरियर और प्रदेश के वित्तीय अधिकारों के मामले में हिमाचल प्रदेश को सुप्रीम कोर्ट में मिली सफलता को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी की लड़ाई जीत ली है और अब शानन परियोजना, चंडीगढ़ पर अपना हक पाने और वाटर सेस के लिए भी लड़ेंगे। बीबीएमबी की लंबी लड़ाई को प्रदेश की जनता की जीत बताते हुए कहा कि इस फैसले से हिमाचल प्रदेश को अगले 20 वर्षों तक हर साल 60 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश को आगामी 20 साल में लगभग 10 हजार से 20 हजार करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिजली की दर 13 से 14 रुपये प्रति यूनिट रहती है तो प्रदेश को सालाना करीब 1000 करोड़ तक का लाभ हो सकता है। अगर छह रुपये प्रति यूनिट की दर रही तो करीब 500 करोड़ रुपये की आय होगी। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास को गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान को 15.50 रुपये, केरल को साढ़े 14 रुपये और तमिलनाडु को 13.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेची गई है।
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भाजपा पर साधा निशाना
सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के अधिकारों से जुड़े मामलों में यह चौथी बड़ी सफलता है। इससे पहले वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध से जुड़े मामलों में मजबूती से पैरवी कर हिमाचल के हितों की लड़ाई जीती गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की करीब 75 लाख जनता और 24 लाख परिवारों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि अतिरिक्त राजस्व का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे के विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और कर्मचारियों को समय पर वित्तीय लाभ देने में किया जाएगा। इन प्रयासों से हिमाचल प्रदेश वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध और खुशहाल राज्य बनेगा। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों के लिए यह लड़ाई क्यों नहीं लड़ी गई। उन्होंने कहा कि भाजपा की विधायकों की खरीद-फरोख्त के बावजूद जनता और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से कांग्रेस विधानसभा में 40 सीटों तक पहुंची।
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