1996 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था हिमाचल
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के बाद परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर पंजाब और हिमाचल के बीच विवाद शुरू हुआ था। समाधान नहीं निकलने पर हिमाचल सरकार ने वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। राज्य ने मांग की थी कि उत्तराधिकारी राज्य होने के नाते उसे बीबीएमबी की परियोजनाओं में 7.19 प्रतिशत हिस्सा दिया जाए। केंद्र की आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के प्रयास सफल नहीं हुए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर 2011 को हिमाचल प्रदेश के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बावजूद वर्ष 1966 से 2011 तक के बिजली बकाये का भुगतान नहीं हो पाया था।
बीबीएमबी की लड़ाई जीते, अब शानन, वाटर सेस और चंडीगढ के लिए भी लड़ेंगे : सुक्खू
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े एरियर और प्रदेश के वित्तीय अधिकारों के मामले में हिमाचल प्रदेश को सुप्रीम कोर्ट में मिली सफलता को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी की लड़ाई जीत ली है और अब शानन परियोजना, चंडीगढ़ पर अपना हक पाने और वाटर सेस के लिए भी लड़ेंगे। बीबीएमबी की लंबी लड़ाई को प्रदेश की जनता की जीत बताते हुए कहा कि इस फैसले से हिमाचल प्रदेश को अगले 20 वर्षों तक हर साल 60 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश को आगामी 20 साल में लगभग 10 हजार से 20 हजार करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिजली की दर 13 से 14 रुपये प्रति यूनिट रहती है तो प्रदेश को सालाना करीब 1000 करोड़ तक का लाभ हो सकता है। अगर छह रुपये प्रति यूनिट की दर रही तो करीब 500 करोड़ रुपये की आय होगी। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास को गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान को 15.50 रुपये, केरल को साढ़े 14 रुपये और तमिलनाडु को 13.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेची गई है।
भाजपा पर साधा निशाना
सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के अधिकारों से जुड़े मामलों में यह चौथी बड़ी सफलता है। इससे पहले वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध से जुड़े मामलों में मजबूती से पैरवी कर हिमाचल के हितों की लड़ाई जीती गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की करीब 75 लाख जनता और 24 लाख परिवारों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि अतिरिक्त राजस्व का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे के विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और कर्मचारियों को समय पर वित्तीय लाभ देने में किया जाएगा। इन प्रयासों से हिमाचल प्रदेश वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध और खुशहाल राज्य बनेगा। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों के लिए यह लड़ाई क्यों नहीं लड़ी गई। उन्होंने कहा कि भाजपा की विधायकों की खरीद-फरोख्त के बावजूद जनता और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से कांग्रेस विधानसभा में 40 सीटों तक पहुंची।