चंबा। जन्म से लेकर पांच साल की आयु तक सुनने और बोलने में असमर्थ बच्चे के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम संजीवनी बना है। कार्यक्रम के तहत इस बच्चे का पीजीआई चंडीगढ़ में मुफ्त कॉकलियर इंप्लांट किया गया। बच्चे के माता-पिता ऑपरेशन को करवाने में असमर्थ थे। ऐसे में जब आरबीएसके के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस बच्चे की बीमारी की पहचान की तो उन्होंने उसे काॅकलियर इंप्लांट के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया। रेफर करने के साथ ही बच्चे को येलो रेफर कार्ड भी दिया गया जिसे दिखाने पर बच्चे का सारा इलाज मुफ्त हुआ। अब यह बच्चा ठीक से सुनने के साथ अच्छे से बोलने भी लगा है। निजी अस्पताल में यदि अभिभावक इस ऑपरेशन को करवाते तो उनका खर्च 15 से 20 लाख आना था।इतनी बड़ी रकम चुकाने में बच्चे के अभिभावक असमर्थ थे। ऐसे में जब उनके बच्चे का मुफ्त में इलाज हुआ तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब इस बच्चे के सफल इलाज के बारे में अमर उजाला को जानकारी दी तो बच्चे का नाम पता उजागर नहीं करने की गुजारिश भी की। जिस बच्चे को जन्म के बाद माता-पिता गूंगे-बहरे के रूप में देख रोज रोते थे उस बच्चे को हंसते-बोलता देख अब उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। इसी इलाके से एक परिवार की तीन बहनें जन्म से फटे हुए होंठ की समस्या से पीड़ित थीं। इन बहनों का इलाज भी आरबीएसके के तहत मुफ्त किया गया। इसके अलावा चंबा से संबंध रखने वाले तीन बच्चों के हृदय के ऑपरेशन भी मुफ्त किए गए। इनमें तीन वर्षीय अवरोही, पांच वर्षीय हर्षित और 11 वर्षीय रियांश निवासी रिंडा, सिंगी और लुडेरा शामिल हैं। ये बच्चे जन्म से हृदय की बीमारी से पीड़ित थे। इन बच्चों की बीमारी में दो से तीन लाख का खर्च आना था लेकिन अभिभावक इतने पैसे जमा करने में असमर्थ थे। इससे वे अपने बच्चों की बीमारी का इलाज नहीं करवा पा रहे थे। आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत इन बच्चों का भी पीजीआई में मुफ्त हृदय के ऑपरेशन किए गए हैं। अब ये बच्चे स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। खंड चिकित्सा अधिकारी पुखरी डॉक्टर नवदीप राठौर ने बताया कि बच्चों की गंभीर बीमारी का इलाज आरबीएसके के तहत मुफ्त हुआ है। बच्चों को इस कार्यक्रम के तहत नया जीवन मिला है। रोजाना स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीमार बच्चों की पहचान करके इलाज की व्यवस्था कर रही हैं।