हिमाचल प्रदेश में मौजूद जैविक कृषि की संभावनाओं को देखते हुए सिक्किम की तर्ज पर हिमाचल को भी जैविक कृषि राज्य बनाया जाएगा। इसकी शुरुआत चंबा जिले की पांगी घाटी से होगी।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने चंबा जिले की जनजातीय पांगी घाटी के मुख्यालय किलाड़ में भूमि स्वच्छता जागरूकता अभियान चरण एक के तहत शून्य बजट जैविक कृषि कार्यशाला एवं संकल्प दिवस के मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यशाला में पांगी घाटी की 16 पंचायतों के किसानों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि पांगी घाटी के लोग भौगोलिक विषमताओं के बावजूद यहां रहकर प्राकृतिक कृषि कर रहे हैं, जो सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि पांगी घाटी के कृषि उत्पादों को राज्य से बाहर भी बाजार उपलब्ध करवाया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि शून्य लागत प्राकृतिक कृषि काफी फायदेमंद रहती है और इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है। जैविक खेती को प्रोत्साहन देने में पर्वतीय कृषि जन कल्याण एवं विकास सहकारी सभा द्वारा किए जा रहे प्रयासों की राज्यपाल ने सराहना की। उन्होंने कहा कि पांगी घाटी के किसानों को शून्य लागत प्राकृतिक कृषि को और बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के लिए जागरूक किया जाएगा। राज्यपाल ने देसी नस्ल की गाय को पालने के प्रति रुझान बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि देशी नस्ल की गाय का गोबर और गोमूत्र अत्यंत उपयोगी व लाभकारी होते हैं। राज्यपाल ने इस मौके पर प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया। लोगों ने राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें घाटी के 4000 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने मांग की कि पांगी घाटी को सुरंग के जरिए जोड़ा जाए। इससे पूर्व पर्वतीय कृषि जन कल्याण एवं विकास सहकारी सभा भंजराडू के मुख्य सलाहकार ओपी शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। पांगी घाटी में सभा के प्रधान वीर सिंह राणा ने राज्यपाल से पांगी घाटी को जैविक कृषि घाटी बनाए जाने के प्रयासों में सहयोग का आग्रह किया।
इससे पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत के पहली बार पांगी घाटी पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन और घाटी के लोगों ने भव्य स्वागत किया। इस मौके पर पांगी के आवासीय आयुक्त करम सिंह चौधरी के अलावा अन्य विभागीय अधिकारी, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि और किसान-बागवान मौजूद रहे।