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Chamba News: फिर धोखा दे गई सरकारी बस, पीठ पर सामान उठा 10 किमी पैदल चले यात्री

Sat, 18 Apr 2026 10:53 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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बाट जीरो के पास खराब हो गई चंबा से घरमाणी जा रही एचआरटीसी की बस
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यात्रियों का आरोप - न भेजी दूसरी बस और न ही राहत देने के लिए उठाए कदम

संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले की सड़कों पर अब सफर मंजिल तक पहुंचने की गारंटी नहीं रहा। एचआरटीसी की बसें ऐसी हालत में दौड़ रही हैं कि हर चढ़ने वाला यात्री अनजाने में एक जोखिम उठा रहा है।
शनिवार को फिर वही कहानी दोहराई गई। बस चली तो सही लेकिन कुछ ही किलोमीटर बाद हांफ गई। इसके बाद दर्जनों यात्री सड़क पर फंसे रहे। मदद न मिलने पर उन्हें 10 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ा। यह सिर्फ खराब बस नहीं, बल्कि टूटते भरोसे की लगातार चलती कहानी है।
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शनिवार को चंबा से घरमाणी जा रही सरकारी बस बाट जीरो के पास खराब हो गई। एक सप्ताह में यह पांचवीं बार है जब रास्ते में बस जवाब दे गई। चंबा बस स्टैंड से बस दोपहर करीब साढ़े तीन बजे रवाना हुई थी। कुछ किलोमीटर दूर इसके पहिये थम गए। बस में 45 से अधिक यात्री सवार थे। इनमें स्कूली विद्यार्थी, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल रहे। इससे अधिक परेशानी तब हुई जब चंबा-अगाहर रूट पर जा रही बस भी सड़क पर खड़ी खराब बस के कारण फंस गई। इससे उस बस में बैठीं करीब 30 सवारियां परेशान हुईं। परिवहन निगम की ओर से न तो दूसरी बस भेजी गई और न ही यात्रियों को राहत पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाया गया। यात्रियों को सामान उठाकर करीब 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। कुछ लोगों ने निजी वाहनों से लिफ्ट लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचने की कोशिश की। उधर, एचआरटीसी के डीडीएम शुगल सिंह ने कहा कि तकनीकी खराबी के कारण बस खराब हुई थी। उस समय कोई बस उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी बस का इंतजाम नहीं हो पाया।

हर दूसरे दिन यही हाल हो रहा है। समझ नहीं आता कि बस में बैठें या पैदल ही निकल जाएं। किराया पूरा देते हैं लेकिन सुविधा शून्य है। - रमेश शर्मा

बच्चों के साथ सफर कर रहे थे। बस खराब होने के बाद मदद नहीं मिली। मजबूरी में पैदल चलना पड़ा। एचआरटीसी भरोसेमंद सवारी थी, अब परेशानी बन गई है। - मेहर दत्त
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चंबा में काम से घर लौट रहे थे लेकिन बीच रास्ते में फंस गए। बैग लेकर 10 किमी पैदल चलना पड़ा। बहुत परेशानी हुई। हर बार पैदल ही सफर करना पड़ता है। - दीनो राम

इस उम्र में पैदल चलना आसान नहीं होता। दूसरी बस भेज दी जाती तो इतनी दिक्कत नहीं होती। निगम को इस पर ध्यान देना चाहिए। यह हर दिन हो गया है। - धर्म चंद
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