करियां में बेड-सोफा बनाने के बाद बचा लकड़ी का कचरा नदी किनारे पहुंच रहा, रोकने वाला तंत्र बेखबर
चेतावनी बोर्ड के नीचे ही डंप हो रहा कचरा, सफाई और निर्माण कार्य का मलबा भी नदी तट पर पहुंचने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। करियां में फर्नीचर का कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन इसकी कीमत रावी का तट चुका रहा है। बेड, सोफा, अलमारी और अन्य फर्नीचर बनाने के बाद निकलने वाला लकड़ी का कचरा रोजाना गाड़ियों में भरकर नदी किनारे पहुंचाया जा रहा है।
देखते ही देखते रावी का तट लकड़ी के टुकड़ों, बुरादे और अन्य कचरे से भरता जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुले में कचरा फेंकने का यह सिलसिला लगातार जारी रहने के बावजूद पंचायत और संबंधित विभागों की निगरानी कहां है।
करियां बाजार में फर्नीचर बनाने वाले कई व्यापारी हैं। रोजाना निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में लकड़ी का कचरा निकलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके उचित निपटारे की व्यवस्था करने के बजाय कचरा नदी तट पर पहुंचाया जा रहा है। इससे रावी किनारे की प्राकृतिक सुंदरता बिगड़ने के साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय निवासी महिंद्र सिंह, अजय कुमार, जगदीश कुमार, प्रेम सिंह, योगराज, सुरेंद्र, प्यार सिंह और मोहन कुमार ने कहा कि वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन को मौके का निरीक्षण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय रहते रोक नहीं लगी तो रावी का स्वच्छ तट कचरे के ढेर में तब्दील हो जाएगा।
बोर्ड चेताता रहा, नीचे कचरा बढ़ता रहा
स्थानीय लोगों के अनुसार एनएचपीसी ने नदी तट पर चेतावनी बोर्ड तो लगा दिया, लेकिन बोर्ड के ठीक आसपास ही गाड़ियों से कचरा फेंका जा रहा है। उनका कहना है कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही। लोगों के अनुसार सफाई ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार भी यहां कचरा और मलबा फेंक रहे हैं। इससे नदी तट धीरे-धीरे अनधिकृत कचरा स्थल में बदलता जा रहा है।
जल्द होगा निरीक्षण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता राहुल शर्मा ने बताया कि जल्द टीम नदी तट का निरीक्षण करेगी। कचरा या मलबा फेंकते हुए जो भी पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।