फूल यात्रा या दाैरान ग्रामीण। स्रोत : जागरूक पाठक
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी में सोमवार को पारंपरिक तरीके से जिलास्तरीय ऐतिहासिक फुल यात्रा उत्सव का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय मेले के शुभारंभ पर गूरों ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की।
फुल यात्रा मेला ग्रीष्म ऋतु के समापन और सर्दियों के आगमन का प्रतीक माना जाता है। सदियों से लोग इस मेले को मना रहे हैं। पांगी में पहले आपसी मिलन का एक मात्र साधन मेले और त्योहार ही होते थे। पांगी के लोग फुल यात्रा मेले से पहले अपनी जमींदारी के साथ सर्दियों का खाने-पीने का सारा सामान इकट्ठा कर लेते थे। पशुओं के चारे को भी सर्दियों से पहले एकत्रित कर लिया जाता था। सर्दियों में यहां भारी मात्रा में बर्फबारी होती है, इस वजह से लोग घरों में दुबककर रह जाते हैं।
फुल यात्रा उत्सव 14 अक्तूबर को मनाया जाता है। यह तीन दिन तक मनाया जाता है। मेले में पहले नो प्रजाएं (लुज, सुराल, धरवास, करयास, कूफ़ा, कवास, हुडान, किरयूनी और किलाड़ की प्रजाएं फुलयटनु मैदान में इकट्ठा होकर मेला मनाती थी। अब कूफ़ा, कवास, किलाड़, करयास की प्रजाएं इसमें भाग लेती हैं। भरमौर-पांगी के विधायक डॉक्टर जनक राज ने किलाड़ हेलीपैड में पहुंचकर करयास प्रजा मंडल की ओर से मां वालीन माता मंदिर से आने वाले रथ यात्रा का स्वागत किया। वह रथ यात्रा में शामिल होकर फूलयाटनू मैदान तक पहुंचे। विधायक ने पांगी घाटी के पारंपरिक वाद्य यंत्रों से होने वाले इस ऐतिहासिक फुल यात्रा उत्सव का अनुभव किया।