पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी में बुधवार को पारंपरिक तरीके से ऐतिहासिक फुल यात्रा का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस मेले के शुभारंभ पर गुरों ने पारंपरिक तरीके से पूजा अर्चना कर शुरूआत की। फुल यात्रा मेला ग्रीष्म ऋतु के समापन और सर्दियों के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
पांगी में फुलयात्रा मेला कब से मनाया जा रहा है, इसके बारे में किसी को अधिक जानकारी नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि सदियों से लोग इस मेले को मना रहे हैं। पांगी में पहले आपसी मिलन का एक मात्र साधन मेले और त्योहार ही होते थे। पांगी के लोग फुलयात्रा मेले से पहले अपनी जमींदारी के साथ-साथ सर्दियों का खाने पीने का सारा सामान इकट्ठदा कर लेते थे।
पशुओं के चारे को भी सर्दियों से पहले एकत्रित कर लिया जाता था। सर्दियों में यहां भारी मात्रा में बर्फबारी होती है। इस वजह से लोग घरों में दुबककर रह जाते हैं। फुलयात्रा मेले के दिन 14 अक्तूबर (29 कार्तिक) को मनाया जाता है।
यह मेला तीन दिन तक मनाया जाता है है। मेले में पहले नो प्रजाएं (लुज, सुराल, धरवास, करयास, कूफ़ा, कवास, हुडान, किरयूनी और किलाड़ की प्रजाएं फुलयतानु मैदान में इकट्ठा होकर मेला मनाती थे। मगर अब कूफ़ा, कवास, किलाड़, करयास की प्रजाएं ही भाग लेती हैं।