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होली के दिन उठी परिवार के चार सदस्यों की एक साथ अर्थियां

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तीसा (चंबा)। चुराह के सुइला गांव में हुए भीषण अग्निकांड ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। अग्निकांड में जान गंवा चुके एक ही परिवार के चार सदस्यों की सोमवार को एक साथ अर्थियां उठी। सुइला गांव के तेजरू नाले में स्थित श्मशानघाट में देसराज, डोलमा, रितिक ठाकुर और मनोज ठाकुर का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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इस दौरान हर किसी की आंख नम थी। 60 वर्षीय बुजुर्ग चुनी को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि भगवान ने उनकी सारी खुशियां छीन ली हैं। हंसता-खेलता परिवार पल भर में ही बिछड़ गया है। लोग उन्हें ढांढस बंधाते हुए अपने पोते की देखभाल करने और बूढ़ी पत्नी को हौसला देने की बात कहते दिखे। सोमवार को चुराह क्षेत्र में किसी ने भी रंगों का त्योहार नहीं मनाया।
बताया जा रहा है कि सुइला निवासी 60 वर्षीय चुनी भेड़-बकरियों को लेकर पठानकोट गया हुआ था। अब गर्मियों में वह अपने भेड़-बकरियों को लेकर चुराह लौट रहा था। रविवार रात को उन्होंने दूसरे भेड़पालकों संग सरोल में रुकने की योजना बनाई थी लेकिन, काल को कुछ और ही मंजूर था। देररात मकान में लगी आग ने उनका बेटा-बहू और दो पोते छीन लिए। सूचना मिलने पर जैसे-तैसे वह गाड़ी और फिर दो से तीन घंटे पैदल रास्ता तय कर गांव पहुंचा तो दंग रह गया।
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उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि अब उनका बेटा, बहू और दो पोते इस दुनिया में नहीं रहे हैं। वहीं, चुनी की बुजुर्ग पत्नी आलमो देवी भी बेसुध पड़ी हैं। अब इन दोनों बुजुर्गों के कंधों पर एक सात साल के पोते की देखभाल का जिम्मा आ गया है। आलमो बेटे-बहू और पोतों की याद में बार-बार गश खाकर गिर रही हैं। मासूम नितिन अब दादी से मां-बाप और भाइयों के बारे में पूछ रहा है। वहीं, मकान के अग्निकांड में राख हो जाने के बाद अब चुनी ने अपने भाई के घर में आश्रय लिया है। कुलमिला कर सुइला गांव में हुए इस अग्निकांड ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
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