चंबा। पर्यटन स्थल खज्जियार की झील को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए हरेक वर्ष पांच लाख खर्च किए जाएंगे। यह धनराशि ईको टूरिज्म सोसायटी की तरफ से व्यय की जाएगी। इसको लेकर वन्य प्राणी विभाग और ईको टूरिज्म सोसायटी ने पूरी योजना तैयार कर ली है। खज्जियार की झील के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए अनावश्यक गाद और अन्य अनावश्यक कूड़े को बाहर निकाला जाएगा। हालांकि इससे पहले भी विभाग लाखों की धनराशि झील को संवारने पर खर्च कर चुका है। चारों तरफ हरे-भरे मैदान के बीच में बनी इस झील को देखने के लिए देश-विदेश के सैलानी यहां पहुंचते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने इसी सुंदरता को देेखते हुए इसे मिनी स्विटजरलैंड का दर्जा दिया था लेकिन बारिश के दौरान झील में गाद घुलने से इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था। इसके चलते वन्य प्राणी विभाग ने झील को बचाने के लिए सरकार से बजट की मांग की। सरकार ने अनावश्यक गाद निकालने के लिए लाखों का बजट भी स्वीकृत किया। कई टन गाद झील से निकाली जा चुकी है। अब वन्य प्राणी विभाग ने हरेक वर्ष झील की देखरेेख के लिए लाखों की धनराशि खर्च करने की योजना बनाई है। इसमें ईको टूरिज्म सोसायटी के जरिये हरेक वर्ष पांच लाख झील के जीर्णोद्धार पर खर्च होंगे। इसके अलावा विभाग झील की महत्वता को स्थानीय लोगों और सैलानियों को भी जागरूक कर रहा है।
ईको टूरिज्म के जरिये हरेक वर्ष झील के जीर्णोद्धार पर पांच लाख खर्च किए जाएंगे। झील खज्जियार की सुंदरता का अभिन्न अंग है। इसे बचाने के लिए वन्य प्राणी विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है। -अमित शर्मा, वनमंडलाधिकारी वन्य प्राणी विभाग चंबा।