पर्यावरण को हो रहा नुकसान, मामले में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग नहीं दिख रहे गंभीर
जिले में कार्य कर रहे हैं 300 से अधिक दवा विक्रेता और दर्जनों निजी क्लीनिक
वैज्ञानिक तरीके से बायोमेडिकल वेस्ट का निष्पादन करना होता है अनिवार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में दवा विक्रेता और निजी क्लीनिक संचालक बायोमेडिकल वेस्ट को नदी-नालों में ठिकाने लगा रहे हैं। इससे वातावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
सिरप की खाली बोतलें, टैबलेट के खाली पत्ते और इस्तेमाल हो चुके इंजेक्शन कहीं न कहीं नजर आ जाते हैं। इन्हें दवा विक्रेता या निजी क्लीनिक संचालक फेंक रहे हैं। बायोमेडिकल वेस्ट को वैज्ञानिक तरीके से निष्पादित करना अनिवार्य है। जिले में इस नियम की पालना नहीं हो रही है। करियां, सुल्तानपुर, पक्का टाला और राठ घार के पास बायोमेडिकल वेस्ट देखा जा सकता है। हैरानी की बात है कि प्रशासन से लेकर अन्य सरकारी विभाग भी इसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जिले में 300 से अधिक दवा विक्रेता और दर्जनों निजी क्लीनिक संचालित हैं। इनसे रोजाना बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है लेकिन इसकी नियमित निगरानी नहीं हो रही है।
टीबी अस्पताल के बाहर मिला था एक्सपायरी दवाओं का जखीरा
कुछ वर्ष पहले टीबी अस्पताल से कुछ दूरी पर सड़क के किनारे एक्सपायर दवाइयों का जखीरा मिला था। इसे किस दवा विक्रेता ने फेंका था। इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है। भगोत में भी स्थानीय लोग अपने खेतों में बायोमेडिकल वेस्ट मिलने की शिकायत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से कर चुके हैं। अन्य स्थानों पर भी बायोमेडिकल वेस्ट खुले में देखा गया है।
बायोमेडिकल वेस्ट को सही से निष्पादित नहीं करने की शिकायत उनके पास पहुंची है। दवा निरीक्षक को निर्देश दिए हैं कि वे सभी दवा स्टोरों और निजी क्लीनिकों में निरीक्षण के दौरान इसकी जांच करें। वह स्वयं भी औचक निरीक्षण करके इसमें नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
- डॉ. जालम सिंह भारद्वाज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी