भरमौर (चंबा)। खड़ामुख में चमेरा जलाशय में समाई कार के साथ लापता दोनों लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन तीन घंटे बाद शुरू हुआ। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने खड़ामुख पुल पर चक्का जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चक्का जाम होने से देखते ही देखते चंबा और भरमौर की ओर छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर पहुंचने और गोताखोरों को बुलाकर सर्च ऑपरेशन शुरू करने की मांग पर अड़े रहे। उसके बाद करीब दस बजे एसडीएम भरमौर मनीष सोनी मौके पर पहुंचे। उन्होंने गुस्साए ग्रामीणों की बात सुनकर एनएचपीसी प्रबंधन के अधिकारियों को गोताखोरों और राफ्टरों को मौके पर भेज कर सर्च ऑपरेशन शुरू करने के निर्देश दिए। एसडीएम के निर्देश के बाद एनएचपीसी के गोताखोर और राफ्टर मौके पर पहुंचे और जलाशय में लापता लोगों की तलाश शुरू की गई। उसके बाद ही ग्रामीण शांत हुए ने भरमौर-पठानकोट एनएच को वाहनों के लिए बहाल किया।
पैरापिटों का नामोनिशान तक नहीं
जलाशय के इर्द-गिर्द पैरापिटों का नामोनिशान तक नहीं दिखा। एनएचपीसी प्रबंधन की लापरवाही इस कद्र हावी है कि एनएच किनारे जलाशय के आसपास कोई सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं किए गए हैं।
भरमौर-पठानकोट एनएच पर खड़ामुख के पास कंपनी प्रबंधन की लापरवाही से कई परिवारों से उनके चिराग छिन चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक कंपनी प्रबंधन ने एनएच किनारे क्रैश बैरियर नहीं लगाए हैं।
ताउम्र के लिए जख्म दे गया हादसा
जन्माष्टमी के दिन हुई दुर्घटना दोनों परिवारों को ताउम्र के लिए जखम दे गई। गिल्लू राम के बूढ़े मां-बाप, पत्नी और दो बच्चों को रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं, मनोहर लाल रोजमर्रा की तरह रविवार को अपने बच्चों (बेटा-बेटी) से सुबह जल्द लौटकर मंदिर जाकर माथा टेकने का वायदा कर गया था। मनोहर के दुर्घटना में लापता होने की सूचना मिलते ही उनकी माता गश खाकर घर की चौखट पर गिर पड़ीं। जबकि, उनकी पत्नी बार-बार गश खाकर सुधबुध खो रही हैं। अब बच्चों के पालन-पोषण की चिंता दोनों मृतकों के परिवारों को सता रही है। हादसे के बाद दोनों मृतकों के गांवों में मातम पसर गया है।
दुर्घटना ने खोली प्रशासन ने इंतजामों की पोल
कार दुर्घटना ने प्रशासन की पोल भी खोल कर रख दी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के पास संसाधनों के नाम पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने तक के उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि खड़ामुख के पास हुए हादसे के तीन घंटे तक न तो गोताखोर और न ही राफ्टर मौके पर पहुंच सके।
विद्युत परियोजनाओं के लिए निर्धारित मापदंडों में साफ रहता है कि जलाशय के किनारों को लोहे की चादरों से इस प्रकार बंद किया जाए कि किसी को भी जलाशय का पानी तक नजर न आए। बावजूद इसके जिले में इस प्रकार के नियमों को कंपनी प्रबंधन दरकिनार कर रहा है।
एसडीएम मनीष सोनी ने कहा कि खड़ामुख के पास लोहे का जाला लगाने के बारे में कंपनी प्रबंधन को जल्द निर्देश जारी किए जाएंगे। कहा कि लोगों की सुरक्षा की तरफ कंपनी प्रबंधन को भी ध्यान देना चाहिए, जिससे इस प्रकार के हादसों पर रोक लग सके।