सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी ऑफ हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन की बैठक में उठा मुद्दा
राज्य स्तरीय मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन की बैठक में की गई चर्चा
अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण दूसरे डॉक्टरों पर बढ़ रहा बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। प्रदेश के उन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ असुरक्षा महसूस करता है, जहां 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं, क्योंकि वहां स्टाफ की सुरक्षा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते।
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में ही सुरक्षा की व्यवस्था रहती है। यह मुद्दा सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी ऑफ हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन की चंबा में हुई बैठक में उठा। हाल ही में इस कमेटी का गठन हुआ है, जिसकी पहली बैठक चंबा में आयोजित की गई। इसमें प्रदेश और जिले के मेडिकल ऑफिसरों ने भाग लिया।
मेडिकल ऑफिसर के राज्य अध्यक्ष डॉ. अंकुश ठाकुर ने बताया कि आज के परिवेश में डॉक्टरों को दूरदराज के क्षेत्रों में ड्यूटी देना मुश्किल हो रहा है। हल्की सी बात पर भीड़ जुट जाती है। बिना जांच पड़ताल डॉक्टरों से अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया जाता है। प्रदेश के अस्पतालों में मेडिकल ऑफिसरों के कई पद खाली हैं। कुछ अस्पतालों में स्वीकृत पदों की संख्या बेहद कम है। इस कारण डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ रहा है।
बैठक में मेडिकल ऑफिसर्स के लिए कॅरिअर में आगे बढ़ने की योजनाएं, एनपीए से जुड़े मुद्दों को फिर से शुरू करना और वित्तीय बोझ, स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा और मेडिकेयर सर्विस प्रोटेक्शन एक्ट 2017 की अधिसूचना, ड्यूटी के घंटे और क्षतिपूरक अवकाश की अधिसूचना, मेडिकल ऑफिसर की वरिष्ठता सूची, मेडिकल कॉलेजों में पीजी पॉलिसी, एसआर पॉलिसी और डीपीसी, मेडिकल कॉलेजों का स्पेशलिस्ट कैडर और कॉमन कैडर, मरीजों के अपनी जेब से होने वाले खर्च में कमी, स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने की रणनीतियां, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मजबूत करना, पेरिफेरल स्वास्थ्य संस्थानों में पैरामेडिकल, स्टाफ नर्स, एमपीडब्लयू, चतुर्थ श्रेणी, अन्य सहायक कर्मचारियों के खाली पदों को भरना और पेरिफेरल स्वास्थ्य संस्थानों में डेटा एंट्री ऑपरेटरों की तैनाती के लिए नीति बनाने सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसे मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य सचिव को भेजा जाएगा।