चंबा के पशुपालन विभाग में स्टाफ की कमी, तीन अस्पतालों का जिम्मा एक पशु चिकित्सक पर
पांच वरिष्ठ पशु चिकित्सकों के पद स्वीकृत, लंबे समय से चार वरिष्ठ चिकित्सकों के पद खाली
रिंपी ठाकुर
चंबा। जिले के पशुपालन विभाग में कर्मचारियों और चिकित्सकों की कमी के कारण पशुपालकों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। विभागीय रिकॉर्ड में विभिन्न पद स्वीकृत होने के बावजूद अधिकांश पद वर्षों से खाली हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। स्थिति यह है कि कई पशु चिकित्सालयों का कार्यभार एक ही चिकित्सक के भरोसे है।
जिले में पांच सालों से वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारियों के पांच पद स्वीकृत हैं। इनमें केवल एक पद पर ही नियुक्ति है जबकि चार खाली हैं। इसी प्रकार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के 90 पद भी रिक्त हैं। इससे विभाग का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा पशु चिकित्सकों के 25 पद स्वीकृत हैं। इनमें छह रिक्त हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति उन क्षेत्रों में है जहां एक ही पशु चिकित्सक को तीन-तीन अस्पतालों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। चिकित्सकों की कमी से नियमित जांच, उपचार, टीकाकरण और आपातकालीन सेवाओं पर असर पड़ रहा है। दूरदराज के गांवों से आने वाले पशुपालकों को कई बार बिना इलाज लौटना पड़ता है या निजी सेवाओं का सहारा लेना पड़ता है। जिले में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। बड़ी संख्या में परिवार अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर हैं। स्टाफ की कमी के कारण पशुओं के उपचार में देरी हो रही है। कई बार गंभीर बीमारियों और संक्रमण के मामलों में समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल पाती जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यदि रिक्त पदों को शीघ्र नहीं भरा गया तो पशुपालन सेवाओं की गुणवत्ता और अधिक प्रभावित हो सकती है।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. राकेश भंगालिया ने कहा कि बीते करीब पांच सालो से स्टॉफ कि काफी कमी चल रही है। सरकार को भी अवगत करवाया है। उम्मीद है कि जल्द स्टॉफ कि तैनाती होगी। संवाद