चंबा। जिले में दिसंबर और जनवरी महीने की बर्फबारी सेब का उत्पादन तय करेगी। सेब की पैदावार के लिए अगले दो महीने काफी महत्वपूर्ण हैं।
सेब की अच्छी पैदावार के लिए निर्धारित 800 से 1200 घंटे तक पेड़ों के नीचे ठंडक रहनी चाहिए। इससे ज्यादा भी ठंडक रहती है तो भी बागवानों को काफी फायदा होगा। इससे सेब की सेटिंग अच्छी होगी। बंपर फसल की उम्मीद भी रहेगी। यदि उक्त मापदंड से नीचे ठंडक रहती है तो सेब की सेटिंग प्रभावित होगी। साथ ही पैदावार पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में जिले के बागवान सेब के पेड़ों के इर्द-गिर्द तौलिये बनाने में जुट गए हैं, जिससे अगले दो महीने में बारिश और बर्फबारी होने से सेब के पेड़ों के लिए चिलिंग ऑवर्स पूरे हो सकें।
गौरतलब है कि चंबा के भरमौर, पांगी, तीसा, जोत, जुम्हार, सलूणी और हिमगिरी सहित ऊंचे इलाकों में सेब की पैदावार होती है। जिले के बागवानों की आय का सेब महत्वपूर्ण साधन है। बागवानों में राकेश कुमार, विनोद कुमार, सुरेंद्र सिंह और मोहन कुमार ने कहा कि सेब की बेहतर पैदावार के लिए मौसम की काफी भूमिका रहती है। दिसंबर के दो सप्ताह बीत गए हैं, मगर मौसम अभी तक साफ है। दिसंबर और जनवरी सेब की पैदावार के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इन महीनों में ही बारिश और बर्फबारी रहती है।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. कृपाल चंबियाल ने कहा कि सेब की बेहतर पैदावार के लिए चिलिंग ऑवर्स काफी महत्वपूर्ण हैं। सेब की बेहतर सेटिंग के लिए आठ सौ से लेकर 1200 घंटे ठंडक के रहते हैं। इससे सेब की बेहतर पैदावार की उम्मीद रहती है।