चांजू (चंबा)। चांजू नाले को लोग जान जोखिम में डालकर पार करने को मजबूर हैं।
शालुई, घेवा, कुंडोली, चैंजला, धन्योता, भंगोड़ी और फनोता गांवों के ग्रामीणों की बरसात के दिनों में मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2009 में चांजू सड़क के निर्माण कार्य के दौरान द्रभाला पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। उसके बाद बरसात में नाले पर बना लकड़ी का पुल पानी के तेज बहाव में बह गया। तब से लेकर आज तक लोक निर्माण विभाग ने नए पुल का निर्माण नहीं करवाया। नतीजतन, बीमारों और गर्भवती महिलाओं को पालकी में उठाकर नाले को पार कर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों चैन लाल, डेलो राम, तिलक राज, वेदी ब्यास आदि का कहना है कि ग्रामीणों की आवाजाही का यही एकमात्र रास्ता है। पुल न होने की वजह से नाले के बीच से ही ग्रामीण स्वयं और अपने मवेशियों को दूसरे छोर तक पहुंचाने के लिए मजबूर हैं। भेड़ पालक इंद्र सिंह का कहना है कि रोजाना उन्हें अपनी भेड़-बकरियों को चराने के लिए नाले के पानी में उतरकर दूसरी तरफ लेकर जाना पड़ता है। कई बार भेड़-बकरियां पानी के तेज बहाव में बह भी चुकी हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। लिहाजा, बरसात के दिनों में अक्सर वह भेड़-बकरियों को चराने के लिए नहीं ले जा पाते हैं। कहा कि नाले पर पुल बनने से ग्राम पंचायत दियोला, चांजू और देहरा के दर्जनों गांवों की पांच हजार की आबादी को आवाजाही में लाभ मिलेगा। जिला परिषद सदस्य अंजू देवी का कहना है कि सरकार को ग्रामीणों की समस्या को ध्यान में रखते हुए जल्द पुल का निर्माण करवाना चाहिए।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता शैलेश राणा ने बताया कि कनिष्ठ अभियंता को मौके पर भेज कर वास्तुस्थिति का जायजा लिया जाएगा।
चुराह के उपमंडलाधिकारी गिरीश शर्मा ने बताया कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। विकास खंड अधिकारी से इसकी जानकारी मांगी जाएगी।