क्षेत्रीय चिकित्सालय चंबा में पिछले तीन दिन से बिना स्टेरेलाइजेशन (बंध्याकरण) के ही ऑपरेशन हो रहे हैं। इसका कारण इस प्रक्रिया में प्रयोग आने वाली ऑटो क्लाइव मशीन का खराब हो जाना है।
उधर बेचारे मरीजों को पता तक नहीं है कि उनके जीवन के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। चिकित्सा विज्ञान में स्टेरेलाइजेशन की विधि को उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है कि जितना ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक के अनुभव को। स्टेरेलाइजेशन की विधि में ऑपरेेशन के दौरान मरीज के शरीर में प्रयोग लाए जाने वाले प्रत्येक उपकरण व अन्य वस्तुुुओं को इस मशीन द्वारा जीवाणु और विषाणु रहित किया जाता है।
इस मशीन को चिकित्सा जगत की भाषा में ऑटो क्लाइव कहा जाता है। हैरानी की बात है कि पिछले तीन दिनों से इतना महत्वपूर्ण उपकरण क्षेत्रीय चिकित्सालय चंबा के ऑपरेशन थियेटर में खराब पड़ा है। अचंभा तो तब होता है कि ऑपरेशन करने वाला स्टाफ भी इस बारे में चुप्पी साध कर बिना इस मशीन के ऑपरेशन किया जा रहा है। ऐसे में अगर किसी मरीज को भविष्य में परेशानी होती है तो उसकी हालत का जिम्मेवार किसे बनाया जाएगा।
उधर सूत्रों से पता चला है कि इस मशीन को ठीक करने वाला देश की राजधानी दिल्ली से पीछे कोई नहीं मिलने वाला है।
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मामले की जांच करेंगे : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी जीआर कौशल ने बताया कि चिकित्सालय प्रबंधन ने उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। वैसे चिकित्सालय में ऑटो क्लाइव की दो मशीनें रखी हुई हैं लेकिन दूसरी मशीन का उपयोग न किए जाने और बिना स्टेरेलाइजेशन के ऑपरेशन करने के मामले की जांच की जाएगी।