चंबा। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल की सजा सुनाई और 2.10 लाख का मुआवजा शिकायतकर्ता को जारी करने के आदेश दिए हैं। शहर के साथ लगते एक बैंक से व्यक्ति ने दो लाख का ऋण लिया। ऋण लेने संबंधी समस्त औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए व्यक्ति ने अपने दस्तावेजों समेत कुछ चेक बैंक में जमा करवाए।
इस दौरान बैंक प्रबंधन ने व्यक्ति को समयानुसार किस्तें चुकता करने के बारे में भी आगाह किया लेकिन व्यक्ति ने ऋण लेने के बाद समय पर किस्तों का भुगतान नहीं किया। इसको लेकर बाकायदा बैंक प्रबंधन की ओर से दोषी को नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों का जवाब देना भी उसने उचित नहीं समझा। आखिरकार बैंक प्रबंधन ने उसकी ओर से दिए गए चेक बैंक में कैश करने के लिए लगाए। इस दौरान बैंक में दिया गया चेक बाउंस हो गया।
इसके बारे में दोषी को अवगत करवाया गया लेकिन दोषी ऋण के पैसों को लौटने में टालमटोल करने लगा। इसके बाद आखिरकार बैंक प्रबंधन की ओर से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में केस दायर कर दिया गया। समस्त सबूतों और दलीलों को मद्देनजर रखते हुए माननीय अदालत ने अपना अहम फैसला सुनाते हुए चेक बाउंस मामले में दोषी को एक वर्ष का कारावास और 2.10 लाख रुपये मुआवजा शिकायतकर्ता को सौंपने की सजा सुनाई है।