सिहुंता-लाहड़ू मार्ग पर ढाई साल से निर्माण अधूरा, 22 किलोमीटर की राह पर हर दिन जोखिम भरा सफर
एक दिन काम, दो दिन ठप, धूल के गुबार में गुम हो जाती है राह, जाम-हादसों के साये में सफर कर रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिहुंता (चंबा)। करोड़ों रुपये की लागत से सड़क संवारने का काम चल रहा है, लेकिन सिहुंता-लाहड़ू मार्ग पर लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। 78 करोड़ रुपये की लागत से 22 किलोमीटर सड़क की टारिंग और सौंदर्यीकरण का काम ढाई साल से जारी है।
बावजूद इसके राहगीरों को धूल भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। वाहनों के गुजरते ही धूल के गुबार उठते हैं और कई बार सामने से आने वाला वाहन तक दिखाई नहीं देता। इससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी है। एक दिन काम होता है तो अगले दो दिन काम बंद रहता है। सड़क पर उड़ती धूल से वाहन चालकों के साथ आसपास रहने वाले लोग भी परेशान हैं। मार्ग पर जाम लगने से आवाजाही भी प्रभावित होती है। लोगों का कहना है कि जब तक निर्माण कार्य तेज गति से पूरा नहीं होता, तब तक इस परेशानी से राहत मिलना मुश्किल है। उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता करनैल सिंह ने बताया कि सिहुंता-लाहड़ू मार्ग पर काम चल रहा है। विभाग ने करीब चार माह के भीतर काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
सड़क का काम लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अभी तक लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। धूल के गुबार के बीच वाहन चलाना पड़ता है। कई बार सामने से आने वाला वाहन भी नजर नहीं आता है। - माधो राम
इस मार्ग पर सफर करना रोज की परेशानी बन गया है। सड़क पर धूल उड़ने से आगे देखना मुश्किल हो जाता है। वाहन चालकों को बेहद सावधानी से गाड़ी चलानी पड़ती है। - पंजू राम
निर्माण कार्य की रफ्तार बहुत धीमी है। एक दिन काम होता है, फिर दो दिन बंद रहता है। सड़क के दोनों ओर लोगों को दिक्कतें होती हैं। विभाग को काम में तेजी लानी चाहिए। - अशोक कुमार
सड़क पर उड़ती धूल से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। मार्ग पर जाम लगने से आवाजाही प्रभावित होती है। करोड़ों खर्चने के बावजूद बेहतर सड़क की सुविधा नहीं मिली है। -करतार सिंह