संडूह गांव के लोग बच्चों को पीठ पर और बाइक को धक्का देकर करवाते हैं सड़क के पार
बाट पंचायत का संपर्क मार्ग खड्ड में तब्दील, दो बार मरम्मत के बाद भी नहीं सुधरे हालात
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। विकास के दावों के बीच बाट पंचायत का संडूह गांव आज भी एक ऐसे रास्ते के भरोसे है जो सड़क कम और बहता नाला ज्यादा नजर आता है। हर सुबह स्कूल जाते बच्चों से लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों तक, हर किसी को जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरना पड़ता है। दो बार मरम्मत और पुली निर्माण के वादों के बावजूद हालात जस के तस हैं। बरसात से पहले ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि यह एकमात्र संपर्क मार्ग कभी भी गांव को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट सकता है।
गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला संपर्क रास्ता नाले का रूप ले चुका है। यही एकमात्र रास्ता ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा है। इसकी मौजूदा स्थिति हर दिन खतरे को दावत दे रही है। जहां कभी पक्की सड़क होती थी, वहां अब गहरा गड्ढा और बहता पानी नजर आता है। दोपहिया वाहन चालक बाइक को पानी से भरे नाले में धक्का देकर किसी तरह पार कर रहे हैं। कई बार ग्रामीण खुद मिलकर सामान और वाहन पार करवाने में मदद करते हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। छोटे बच्चों को परिजन पीठ पर उठाकर या गोद में लेकर नाले को पार कर स्कूल पहुंचाते हैं।
देस राज, सुरेश कुमार, कर्म सिंह, योग राज, महिंद्र सिंह और दलजीत सिंह ने कहा कि इस मार्ग की दो बार मरम्मत की गई लेकिन दोनों बार कुछ समय बाद ही स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। विधायक ने भी यहां पुली के निर्माण का आश्वासन दिया था लेकिन वर्षों बाद भी कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, जमीन पर काम नहीं दिखता। बरसात नजदीक आते ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बारिश के दौरान नाले के तेज बहाव से रास्ता बंद हो जाता है। इससे गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है।
ग्राम पंचायत बाट के उपप्रधान रमेश शर्मा ने बताया कि यह रास्ता पहले से ही काफी खस्ताहाल है। बारिश में काफी पानी आता है। प्रशासन से मांग की है कि इस स्थान पर पुली बनाई जाए।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा ने बताया कि ग्रामीण लिखित में मांग पत्र दें तो विभागीय कर्मी भेज कर निरीक्षण करवाकर उचित कदम उठाए जाएंगे।