तीसा (चंबा)। चुराह उपमंडल की 55 पंचायतों के छोटे किसान सब्जी मंडी के अभाव में पिसते जा रहे हैं। चुराह के निचले क्षेत्रों में मटर की फसल तैयार है।
सब्जी मंडी के अभाव में किसानों को मटर के औने-पौने दाम ही मिल रहे हैं। किसानों को मलाल है कि यदि क्षेत्र में सब्जी मंडी होती तो उन्हें मेहनत के अनुरूप ही इसका फल मिल सकता था। वर्षों से चुराह विधानसभा क्षेत्र के किसानों-बागवानों को सब्जी मंडी की सौगात देने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया है। किसानों-बागवानों को मजबूरन औने-पौने दामों में फसलें बेचनी पड़ती हैं। बड़े किसान-बागवान अपने जोखिम पर अमृतसर, पठानकोट और पंजाब की मंडियों में फसल बेचते हैं।
पिछले वर्ष अक्तूबर में किसानों ने खेतों में मटर की बिजाई की थी। अब अप्रैल में फसल तैयार है। ग्रामीण मटर की तुड़ाई के काम में जुटे हैं। सब्जी मंडी न होने पर व्यापारी किसानों के खेतों में ही 20 से 25 रुपये किलो मटर खरीद रहे हैं। किसानों को मलाल है कि यदि क्षेत्र में सब्जी मंडी होती तो उन्हें औने-पौने दामों में मटर की फसल नहीं बेचनी पड़ती। चुराह क्षेत्र में मटर, फ्रासबीन, टमाटर, बंदगोभी, फूलगोभी इत्यादि की बंपर फसल रहती है। अमित कुमार, संजीव कुमार, केसर सिंह, लोकेश कुमार, प्रमोद कुमार, यासीन मोहम्मद, रफीक, रज्जाक और मोहम्मद यासीन ने बताया कि चुराह में सब्जी मंडी की जरूरत है। उपमंडल के भंजराडू स्थित (आना) में लाखों खर्च कर सब्जी मंडी का भवन तो बनाया गया है, लेकिन इसका आज तक प्रयोग नहीं हो पाया है। इस भवन पर न तो सरकार की नजर पड़ी है और न ही संबंधित विभाग ने इसकी कोई सुध ली। ऐसे में सब्जी मंडी भवन का कोई भी इस्तेमाल न होना क्षेत्र के किसानों को निराश कर रहा है।
उपमंडल अधिकारी नागरिक चुराह शशिपाल शर्मा ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। आना में स्थित सब्जी मंडी को लेकर सारी जानकारी एकत्रित कर इसे सुचारू करने के लिए प्रयास किए जाएंगे।