चंबा शहर के चौंतड़ा वार्ड बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे लोग
पार्किंग नहीं, ट्रैफिक जाम और कचरे के बीच लोगों का जीना हो रहा दूभर
शौचालय तक नहीं, वादे पूरा न होने से नाराज जनता, स्कूली बच्चे भी परेशान
रिंपी ठाकुर
चंबा। सुबह होते ही चौंतड़ा वार्ड रिहायशी इलाके से ज्यादा अव्यवस्था के अखाड़े में बदल जाता है। यहां जाम की लंबी कतारें, बदबू से भरा माहौल और बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों की रोजमर्रा की किस्मत बन चुकी है।
स्कूल जाते मासूम बच्चों को ट्रैफिक और कचरे के बीच से गुजरना पड़ता है। लोग हर दिन उसी समस्या को झेलते हैं जिसका समाधान सालों से सिर्फ वादों में कैद है। यह सिर्फ एक वार्ड की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना है जो आंखों के सामने सब देख कर भी अनदेखा कर रहा है।
नगर परिषद के चौंतड़ा वार्ड के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना कर रहे हैं। वार्ड में न तो पार्किंग की व्यवस्था है और न ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ठोस इंतजाम। सुबह के समय जाम लगना आम बात हो गई है।
कन्या स्कूल के सामने बनाई डंपिंग साइट से स्थिति और गंभीर हो गई है। यहां खुले में कचरे की छंटाई की जाती है। इससे आसपास के क्षेत्र में गंदगी और दुर्गंध फैली रहती है। इस वार्ड में पांच स्कूल हैं लेकिन इनके आसपास ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। वार्ड में सार्वजनिक शौचालय की सुविधा भी नहीं है। स्थानीय लोगों ने कहा कि पांच साल पहले नगर परिषद ने हर वार्ड में पार्किंग बनाने का वादा किया था लेकिन यह वादा पूरा नहीं हो पाया है। दोबारा चुनाव आने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
परिचर्चा
सुबह के समय इतना जाम लग जाता है कि घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार स्कूली बच्चों की गाड़ियां फंस जाती हैं लेकिन नगर परिषद कोई ध्यान नहीं दे रही है। - राकेश कुमार
कन्या स्कूल के सामने हर दिन कचरा डाला जाता है। इस स्थान को डंपिंग साइट बना दिया है। बच्चे रोज बदबू और गंदगी के बीच गुजरते हैं। यह उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। - बिलास कुमार
पार्किंग न होने से लोग सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इससे ट्रैफिक व्यवस्था और और खराब हो जाती है। हर समय हादसे का भय रहता है। पुलिस भी तैनात नहीं होती है। - शंकर शर्मा
चौंतड़ा वार्ड में शौचालय तक नहीं है, खासकर महिलाओं को बहुत परेशानी होती है। चुनाव के समय वादे किए जाते हैं लेकिन बाद में कोई सुनवाई नहीं होती। - भूपेंद्र