चंबा। इंजीनियर दिवस पर आज भी चंबा के इंजीनियर कैलाश चंद महाजन को याद किया जाता है। पंजाब और हिमाचल में बिजली उत्पादन में उनका बड़ा योगदान माना जाता है।
सन 1971 की भारत-पाकिस्तान की जंग के दौरान वह पंजाब में अधीक्षण अभियंता के तौर पर कार्यरत थे। सराहनीय कार्यों के लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अधीक्षण अभियंता के पद पर रहते बिजली के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बनाए। इन प्रोजेक्टों से पंजाब में बिजली का उत्पादन शुरू हुआ। पंजाब से सेवानिवृत होने के उपरांत उन्हें सन 1981 में हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में पनविद्युत की संभावनाओं के दोहन के सार्थक प्रयास हुए। उनके बिजली के क्षेत्र में दिए गए योगदान को देखते हुए चंबा में साल खड्ड पर उनके नाम का पावर प्रोजेक्ट बना है। यह बालू में आज भी उनके नाम और उनके कार्य को दर्शाता है। चंबा में इंजीनियर दिवस पर आज भी उनके कार्यों की सराहना की जाती है। उन्होंने चंबा में बिजली बोर्ड के रेस्ट हाउस का नक्शा भी स्वयं तैयार करवाया था। ऐसा रेस्ट हाउस पूरे जिला में ओर कहीं पर भी नहीं बना है। इस रेस्ट हाउस की बनावट सबसे अलग है। वह नौकरी के दौरान पंजाब में बिजली बोर्ड के विभिन्न पदों पर रहे। जिस पद पर उन्होंने कार्य किया। उनके कार्य ही हमेशा सराहना हुई। यही कारण रहा कि उन्हें पदमश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया।