चंबा। भारतीय पारंपरिक कढ़ाई चंबा रूमाल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाली ललिता वकील ने न केवल अपनी मेहनत से इस कला को पुनर्जीवित किया, बल्कि सैकड़ों महिलाओं और युवतियों को प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही हैं। वर्ष 2022 में पद्मश्री सम्मानित ललिता वकील ने वर्ष 1978 से 1980 के बीच औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) चंबा से सिलाई और कढ़ाई में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने स्वयं को पूरी तरह चंबा रूमाल की पारंपरिक कढ़ाई कला के संरक्षण और प्रचार में समर्पित कर दिया।
ललिता वकील पहली महिला हैं, जिन्होंने चंबा रूमाल की पारंपरिक कढ़ाई को बड़े टुकड़ों में रेशम के साथ उकेरा। उन्होंने मल्टी-पैनल सेट, साड़ी, शॉल, दुपट्टे, और स्टोल के लिए आकर्षक डिज़ाइन तैयार किए, जो कला और व्यावसायिकता का सुंदर समन्वय हैं।
ललिता वकील ने देश-विदेश में आयोजित प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं में हिस्सा लेकर चंबा रूमाल को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। उन्होंने अपने अनुभव और कला का उपयोग कर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए और आज भी सरकारी आईटीआई चंबा में प्रशिक्षुओं को प्रेरित करने जाती रहती हैं।
ललिता वकील ने कहा कि अपने स्तर पर सैकड़ों महिलाओं और युवतियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे चुकी हैं और कुछ को प्रशिक्षण दे रही हैं। इससे वे आज स्वावलंबी बनकर अपने परिवारों के भरण-पोषण में योगदान दे रही हैं। उन्होंने एक मजबूत कारीगर-उद्यमी नेटवर्क खड़ा किया है, जिससे चंबा रूमाल की कला का भविष्य भी सुरक्षित हुआ है।
पद्म श्री पुरस्कार – 2022 (कला के क्षेत्र में)
नारी शक्ति पुरस्कार – 2018