मेडिकल काॅलेज चंबा का परिसर। संवाद
चंबा। आकांक्षी जिले के कैंसर रोगियों को इलाज करवाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की कैंसर ओपीडी में विशेषज्ञ न होने से ताला लटक चुका है। गंभीर मरीज समय पर सही इलाज न मिलने के कारण जान गंवा चुके हैं। जिले के करीब 5,000 लोग कैंसर के रोग से ग्रसित हैं, जिन्हें अपना इलाज बाहरी राज्यों में जाकर करवाना पड़ रहा है। एक साल पहले मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ होने से इन मरीजों को चिकित्सीय परामर्श मिल रहा था, लेकिन अब उन्हें चिकित्सीय परामर्श के अलावा अन्य इलाज करवाने के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज और आईजीएमसी शिमला की दौड़ लगानी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज को चंबा में संचालित हुए छह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन एक वर्ष से यहां कोई भी कैंसर विशेषज्ञ नहीं है। एक समय था कि जब यहां तीन विशेषज्ञ ओपीडी में मिलते थे, लेकिन सरकार ने उन विशेषज्ञों का तबादला दूसरे जिलों में कर दिया। इसका न तो सत्ता पक्ष ने विरोध किया और न ही विपक्ष के नेताओं ने अपनी चुप्पी तोड़ी। यही वजह है कि कैंसर रोगियों को अपना इलाज करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी होशियार सिंह, योगराज, विनोद कुमार, संजय शर्मा, मनीष कुमार, चैन सिंह, योगराज, देसराज और केवल कुमार ने बताया कि जो सुविधा मरीजों को चंबा में मिल रही थी। उसे सरकार को बंद नहीं करना चाहिए। कैंसर रोग को खत्म करने के लिए सरकार जागरूकता अभियान तो चला रही है, लेकिन इस बीमारी के इलाज के लिए उचित कदम नहीं उठाए जा रहे।
कैंसर रोग विशेषज्ञ की कमी को लेकर सरकार से बात की गई है। जल्द ही चंबा में विशेषज्ञ की नियुक्ति होने की उम्मीद है। डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज चंबा