चंबा। आकांक्षी जिले में भले ही मेडिकल कॉलेज खुले छह वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां बर्न यूनिट नहीं बन पाई है। आग से झुलसे गंभीर मरीजों को आज भी इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज या आईजीएमसी शिमला रेफर किया जा रहा है।
चंबा में ऐसे मरीजों का इलाज करने के लिए कोई भी विशेष सुविधा नहीं है। अगर कोई आग से झुलसा मरीज अस्पताल में आता है तो उसे सामान्य मरीजों के वार्ड में रखकर उनका इलाज किया जा रहा है। इससे न तो मरीज को सही इलाज मिल पाता है और न ही सही वातावरण। बर्न यूनिट में झुलसे मरीजों के इलाज की अलग से व्यवस्था रहती है। वहां पर स्टाफ भी अलग से तैनात रहता है। मरीज को अधिक कष्ट न हो इसके लिए यूनिट का तापमान भी मरीज के अनुरूप रखा जाता है।
स्थानीय निवासी जय सिंह, विनोद कुमार, वीर सिंह, गुरमीत, जसबीर सिंह, योगराज, कमल कुमार, रमेश, सुरेंद्र और संजय शर्मा ने बताया कि सरकार ने मेडिकल कॉलेज तो खोल दिया है, लेकिन यहां अभी तक सभी सुविधाएं मरीजों को नहीं दी जा रही हैं। छह वर्ष में सरकार यहां बर्न यूनिट नहीं खोल सकी है, जो कि सरकार और विभाग की नजर अंदाजी को साफ बयां करता है।
उन्होंने कहा कि कई बार टांडा रेफर किए मरीज की बीच रास्ते में ही मौत हो जाती है। इसलिए यहां बर्न यूनिट का होना बेहद जरूरी है।
सरोल में नए भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जैसे ही वहां मेडिकल कॉलेज शिफ्ट होगा तो मरीजों को वहां बर्न यूनिट की भी सुविधा दी जाएगी। डॉ. मानिक सहगल, प्रवक्ता, मेडिकल कॉलेज