चंबा के डलहौजी में रामलीला मंचन के दौरान कलाकार।संवाद
डलहौजी (चंबा)। पर्यटन नगरी डलहौजी के सदर बाजार में चल रही ऐतिहासिक रामलीला का अपना विशेष महत्व है। यह मंचन 125 वर्षों से हो रहा है। इसे शुरू करने का श्रेय एक बंगाली बाबू को जाता है। उस समय पूरी चंबा रियासत में केवल डलहौजी में ही रामलीला होती थी।
हर साल इस रामलीला का आयोजन रामा नाटक क्लब के सदस्यों द्वारा बड़े ही उत्साह और निष्ठा के साथ किया जाता है। सदी पुरानी इस रामलीला में आज भी प्राचीन परंपराओं का पालन किया जाता है। आधुनिक युग में भी रामलीला का आकर्षण कम नहीं हुआ है और सैकड़ों दर्शक इसे देखने आते हैं। रामलीला में कलाकारों की सज्जा-वेशभूषा, संवाद और मंच प्रस्तुति का अनुशासन आज भी ज्यों का त्यों है। स्थानीय निवासी अपने परिवार के साथ श्रद्धा भाव से इस ऐतिहासिक मंचन का आनंद लेते हैं।
अमन बने हैं राम, नौ दिन जमीन पर सोते हैं
अमन महिंद्रू, जिन्होंने पिछले 29 वर्षों से भगवान राम का किरदार निभाया है। उनका पहला रोल राजा जनक के मंत्री का था, फिर राजा जनक और अंततः भगवान राम। नौ दिनों तक वह मंच पर सोते हैं और पूरी भक्ति भाव से अभिनय करते हैं। वहीं, तिलक, सदर बाजार निवासी, पिछले 28 वर्षों से रावण का किरदार निभा रहे हैं।