चंबा। जिले में 35 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य संस्थान कई साल से किराये के भवनों में चल रहे हैं। सरकार इन केंद्रों को अभी तक सरकारी भवन मुहैया नहीं करवा पाई है। इस कारण वहां काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर मरीजों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति ग्रामीण क्षेत्रों में धीरे-धीरे दम तोड़ते हुए नजर आ रही है। हालांकि 12 स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं, जो कि चल तो निजी भवनों में रहे हैं, लेकिन उनसे किराया नहीं लिया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि डॉक्टरों को काम करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिलेगा तो वह बेहतर तरीके से मरीजों का इलाज नहीं कर पाएगा। इसलिए सरकार और विभाग को इस दिशा में जरूरी कदम उठाते हुए किराये के भवनों में चल रहे केंद्रों को शीघ्र सरकारी भवनों में शिफ्ट करने की योजना बनानी चाहिए।
स्थानीय निवासी सुरेंद्र शर्मा, जय सिंह, रवि कुमार, अजय कुमार, केवल, सोभिया राम, भाग चंद और रविंद्र कुमार ने बताया कि जिस सरकारी संस्थान का जब तक खुद का भवन नहीं होगा। वहां पर बेहतर सेवाएं कभी भी लोगों को नहीं मिल सकती। उधर, जिला आयुष अधिकारी डॉ. दलीप शर्मा ने बताया कि इस संदर्भ में सरकार को अवगत करवाया जाएगा।