होली (चंबा)। एक तरफ जहां प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के दावे कर रही है तो दूसरी तरफ करीब 10 साल पहले बने आयुर्वेदिक केंद्र न्याग्रां शोपीस बन गया है। हालात यह है कि चार साल से यहां आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र चतुर्थ श्रेणी कर्मी के हवाले है। ऐसे में क्षेत्र के ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्टाफ की तैनाती बारे वे कई बार विभाग से मांग कर चुके हैं। मगर अभी तक कोई व्यवस्था नहीं बन पाई है।
ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार इस स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र की ग्राम पंचायत न्याग्रां, बजोल और ग्रौंडा की करीब 5,000 की आबादी निर्भर करती है। मगर सरकार की ओर से इस स्वास्थ्य केंद्र का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। बिना चिकित्सक के यह स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द यहां चिकित्सक की तैनाती की जाए। ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न पेश आए।
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सरकार की ओर से न्याग्रां पंचायत में खोला गया आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र शोपीस बनकर रह गया है। कहा कि चार सालों से यहां चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है।
उत्तम चंद, स्थानीय निवासी
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आयुर्वेदिक केंद्र के पास अपना भवन भी है। बावजूद इसके यहां अभी तक चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों की दिक्कतें बढ़ रही है।
राजेश कुमार, स्थानीय निवासी।
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सरकार की ओर से यह स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र की तीन पंचायतों को आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज देने के बारे में खोला गया है। मगर इस केंद्र में सरकार अब तक चिकित्सक नहीं भेज पाई है।
अशोक राजपूत, स्थानीय निवासी।
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वर्तमान में यह आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र महज चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले चल रहा है। इससे क्षेत्र की करीब पांच हजार की आबादी को परेशानी हो रही है।
रमेश, स्थानीय निवासी
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी सुरेंद्र सुमन ने बताया कि यह मामला ध्यान में लाया गया है। चिकित्सकों की कमी के चलते ऐसी व्यवस्था बनी है। रिक्तियों के बारे में सरकार को अवगत करवाया गया है।