चंबा। शहर की रहने वाली अनुराधा ने मेहनत और हाथों के हुनर को पहचान दिलाकर उद्यमिता के क्षेत्र में सफलता हासिल की है। उन्होंने चीड़ के पत्तों से सुंदर टोकरियां, गुड़िया और घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाकर न केवल अपनी आजीविका का साधन बनाया बल्कि पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण का संदेश भी दिया।
अनुराधा के हाथों से बनाए उत्पाद अब ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर उपलब्ध हैं। उनके उत्पादों की मांग दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू से आ रही है। अनुराधा बताती हैं कि पहाड़ की कला को शहरों तक पहुंचाना मेरे लिए गर्व की बात है। हर ऑर्डर मेरा आत्मविश्वास बढ़ाता है।
बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अपने घर में ही उत्पादन का दायरा बढ़ा लिया है। वह बताती हैं कि चीड़ के पत्तों का उपयोग पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, क्योंकि जंगलों में जमा ये पत्ते अकसर आग लगने का कारण बनते हैं। इन्हें एकत्र कर उपयोगी वस्तुओं में बदलना प्रकृति के साथ तालमेल का उदाहरण है।
अनुराधा द्वारा बनाई गई टोकरियां खास तौर पर लोकप्रिय हैं, क्योंकि इनमें रखी रोटियां लंबे समय तक गर्म रहती हैं।
स्थानीय महिला समूह बनाए, औरों को दे रहीं प्रशिक्षण
महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए अनुराधा ने स्थानीय महिला समूहों का गठन किया है। वह गांवों और स्कूलों में कार्यशालाएं आयोजित कर अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं ताकि वे भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
मेरी कला प्रकृति के साथ काम करने और महिलाओं को रोजगार देने का जरिया है। मैं चाहती हूं कि हर महिला अपनी कला पर भरोसा करे और अपने दम पर आगे बढ़े। अनुराधा