सलूणी (चंबा)। विकास खंड सलूणी की सिंगाधार पंचायत के आधा दर्जन गांव आज भी सड़क सुविधा से कोसों दूर हैं। ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। तब जाकर उन्हें सड़क और वाहन सुविधा नसीब होती है।
प्रदेश में आज तक जो भी सरकारें बनी। उन सरकारों से गांव के लोगों ने सड़क बनाने की मांग रखी, लेकिन किसी भी सरकार ने ग्रामीणों की इस मांग को पूरा नहीं किया। इसके चलते ग्रामीणों में सरकारों के प्रति भी गहरा रोष है। हाल ही में संपन्न हुई विधानसभा चुनावों में भी ग्रामीणों ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था। पहले ग्रामीणों ने सड़क सुविधा के अभाव में मतदान का बहिष्कार करने का फैसला लिया था, लेकिन जब राजनीतिक दलों के नेताओं ने ग्रामीणों को सड़क बनाने का आश्वासन दिया तो उन्होंने मतदान किया।
पंचायत के कंघेल, टाटोई, कोयल, बंजबाड, शुमनु, बिधबाड़ और मलुंज गांव आजादी के 75 साल बाद भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। गांव में यदि कोई बीमार हो जाए तो उसे पालकी पर उठाकर पांच किलोमीटर पहले सड़क तक पहुंचाया जाता है। उसके बाद निजी वाहन या एंबुलेंस के जरिये उसे अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों में मनोज कुमार, संतोष कुमार, टेक चंद, रवि कुमार, सुरेंद्र, भाग सिंह और केवल कुमार ने बताया कि सड़कें किसी भी क्षेत्र की भाग्य की रेखा होती हैं, लेकिन उनके क्षेत्र में आज तक यह भाग्य रेखा नहीं खिंची गई। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनके गांवों को शीघ्र सड़क से जोड़ा जाए।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता दीपक महाजन ने बताया कि आचार संहिता हटने के बाद गांव को सड़क से जोड़ने के लिए सर्वे करवाया जाएगा। सर्वे के उपरांत आगामी प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।