सलूणी (चंबा)। प्रदेश में मनरेगा और अन्य विकास कार्यों का अंकेक्षण करने वाले 400 खंड और ग्राम संसाधन व्यक्ति (बीआरपी और वीआरपी) पिछले आठ महीनों से अपने मेहनताने का इंतजार कर रहे हैं। ये कर्मी पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता जांचकर सरकार को रिपोर्ट सौंपते हैं, लेकिन भुगतान में देरी से उनका मनोबल टूटने लगा है।
खंड संसाधन व्यक्ति को प्रतिदिन 600 रुपये और ग्राम संसाधन व्यक्ति को 375 रुपये का भुगतान किया जाना तय है। मगर लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण उन्हें परिवार का पालन-पोषण करने में दिक्कतें हो रही हैं।
सामाजिक अंकेक्षण संघ के राज्य अध्यक्ष सुशील कुमार ने बताया कि उनके माध्यम से पंचायतों में मनरेगा कार्यों के साथ 15वां वित्त आयोग, प्रधानमंत्री आवास योजना, मिड-डे मील, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का अंकेक्षण किया जाता है। इसके आधार पर खंड विकास अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी जाती है। इन जांचों के जरिए कई पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं का भी खुलासा हुआ है, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों पर जुर्माना भी लगाया गया।
समाजिक अंकेक्षण संघ के महासचिव यशवंत डोगरा, प्रेस सचिव दिनेश कुमार व खंड संसाधन व्यक्तियों में विनोद शर्मा, अनिल, करतार सिंह और केवल शर्मा ने सरकार से अपील की है कि उनका लंबित मेहनताना जल्द जारी किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उनका कहना है कि उनकी मेहनत से अनियमितताएं उजागर होने के बावजूद उनके कार्यों का उचित सम्मान नहीं हो रहा है।
उधर, सामाजिक अंकेक्षण इकाई के कार्यकारी निदेशक अमर दत्त शर्मा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अपना कार्यभार संभाला है। जल्द ही खंड एवं पंचायत संसाधन व्यक्तियों को मानदेय दिया जाएगा।