मंत्री साहब, भरमौर में अनुसूचित परिवारों
को अभी तक नहीं मिला जनजाति का दर्जा
सातवें जनमंच कार्यक्रम में ग्रामीणों ने ग्रामीण विकास मंत्री के समक्ष उठाया मामला
जनजातीय का दर्जा न मिलने से चुनाव नहीं लड़ पाते लोग, योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ जल विद्युत परियोजनाएं होने के बाद भी होली में अभी से चल रही है बिजली की आंखमिचौनी
अमर उजाला ब्यूरो
होली(चंबा)। कबायली क्षेत्र भरमौर में रहने वाले अनुसूचित जाति परिवारों को जनजातीय का न तो दर्जा मिल पाया है और न ही लोगों के जनजातीय के प्रमाण पत्र बनते हैं। ऐसे में यहां पर रहने वाले ग्रामीण चाह कर भी जनजातीय परिवारों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
होली में आयोजित सातवें जनमंच कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने अपनी ज्वलंत समस्या बारे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर को अवगत करवाया। ग्रामीणों के मुताबिक जनजातीय दर्जा न मिलने के कारण उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में ही इस्तेमाल किया जाता आ रहा है।
जनमंच में ग्रामीणों ने होली सब तहसील को तहसील बनाने की मांग उठाई। ग्रामीणों के मुताबिक कहने को तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 बिस्तरों की व्यवस्था करवाई गई है, लेकिन यहां पर रात के समय लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं तक नहीं मिल पाती हैं। अस्पताल में स्त्री रोग विशेष और अन्य मशीनरी न होने की सूरत में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान भरमौर या फिर जिला मुख्यालय चंबा का ही रुख करना पड़ता है। ऐसे में कई बार तो गर्भवती महिलाओं को अपनी जानों से भी हाथ धोना पड़ा है। ग्रामीणों ने पीएचसी होली में रात्रि सेवाएं आरंभ करवाने और यहां पर स्टाफ की तैनाती करने की मांग पंचायतीराज मंत्री के समक्ष उठाई। ग्रामीणों ने होली क्षेत्र की ज्वलंत समस्या बिजली की आंख मिचौनी बारे में भी मंत्री को अवगत करवाया। अभी से कट लग रहे हैं, यही हाल रहा तो आने वाली सर्दियां अंधेरे में ही गुजारनी पड़ सकती है। कहा कि क्षेत्र में इतनी अधिक जल विद्युत परियोजनाएं होने के बाद भी बिजली की लुक्का-छिप्पी की समस्या और बिजली के भारी-भरकम बिलों की अदायगी ग्रामीणों को करनी पड़ रही है। जनमंच के माध्यम से ग्रामीणों ने पंचायती राज मंत्री को क्षेत्र की सड़कों की दुर्दशा बारे अवगत करवाया। ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य सड़क के अलावा क्षेत्र में सड़कों के कार्य अधर में ही लटके पड़े हैं, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण त्यारी पुल ही है। पिछली सरकार ने बाकायदा त्यारी पुल का शिलान्यास भी कर दिया था। इसके तहत जल्द ही कार्य आरंभ भी होना था। लेकिन, बीते दिनों होने वाली मूसलाधार बारिश के बाद बढ़े जलस्तर को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने त्यारी पुल का निर्माण यहां पर न करते हुए साहं पंचायत के डल्ली में ही पुल को जोड़ने की बात कही है। अधिकारियों का तर्क है कि यहां पर पुल बनाना हादसे का कारण भी बन सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि डल्ली में बने पुल से ही त्यारी के लिए प्रावधान किया जाता है तो ऊपरी त्यारी, निचली त्यारी, बटोहला और कलाह के बाशिंदों को 12 किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ेगा। साथ ही इससे अन्य लोगों को भी परेशानियों ही उठानी पड़ेगी। ग्रामीणों के मुताबिक मणिमहेश न्हौण के दौरान त्यारी पुल से होकर ही वाया कलाह शिवभक्त मणिमहेश की तरफ रुया करते हैं। ग्रामीणों ने त्यारी पुल का जल्द से जल्द कार्य आरंभ करने की मांग उठाई।
अधिकतर आवेदनों का मौके पर किया निपटारा
होली में आयोजित जनमंच में कुल 153 आवेदन आए। जिनमें से अधिकांश का मौके पर निपटारा किया गया। इसके अलावा 196 लोगों के प्रमाण पत्र बनाए गए, स्वास्थ्य शिविर में 151 लोगों का स्वास्थ्य जांचा गया, 9 के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए गए, बेटी है अनमोल के तहत 24 लाभांवित हुए, 70 महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किए गए तथा 18 लोगों के आधार कार्ड रजिस्ट्रेशन किए गए। इस मौके पर भरमौर विधायक जियालाल कपूर, जिलाधीश चंबा हरिकेश मीणा सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।