अमर उजाला ब्यूरो
तीसा(चंबा)। उपमंडल चुराह के तहत तरेला नाला पर बना पुल भूस्खलन की चपेट में आने से मटियामेट हुए लगभग तीन साल बीत गए हैं। मगर आज तक कोई भी नेता तरेला नाला पर स्थायी पुल का निर्माण नहीं करवा पाए हैं। इसके चलते क्षेत्र की चार पंचायतों मंगली, बोंदेड़ी, जुनास और गुईला के करीब पंद्रह हजार लोग सड़क सुविधा से पूरी तरह से कट गए हैं। पुल के टूटने के बाद लोनिवि ने एक सप्ताह में नए पुल के निर्माण कार्य को शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन विभाग ने मात्र नाले पर अस्थायी पुल बनाकर मुंह फेर लिया। यह अस्थायी पुल बार-बार बारिश के कारण बह जाता है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ती है। 19 अप्रैल 2014 की रात को क्षेत्र में हुई तेज बारिश के बाद तरेला नाला पुल की नींव पर साथ लगते पहाड़ से भूस्खलन होने से उसका सारा मलबा पुल पर गिरा गया था। इसके चलते यह पुल धराशायी हो गया। पुल का निर्माण 2001 में लगभग 47 लाख रुपये की लागत से करवाया गया था। इसके बहने के बाद लोकसभा चुनावों के दौरान सांसदों ने इस पुल को लेकर लोगों को तरह तरह के आश्वासनों से लुभाया, लेकिन चुनाव के बाद किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि ने इस पुल के बारे में बात तक नहीं की। अब लोगों को बारिश में आवाजाही की चिंता होती है क्योंकि बारिश में अस्थायी पुल का नामोनिशान नहीं रहता है। इससे क्षेत्र की चार पंचायतें मंगली, बोंदेड़ी, जुनास और गुईला के हजारों लोग वाहन सुविधा के लिए इस अस्थायी पुल पर निर्भर करते हैं। मगर इसके बह जाने से कई लोगों के निजी वाहन सड़क के दूसरे छोर पर ही फंसे रह जाते हैं। इन्हें अब वहां से निकलने के लिए नाले में आए पानी को कम होने का इंतजार रहता है। भाजपा प्रत्याशी हंस राज का कहना है कि विपक्ष में होने के चलते कांग्रेस सरकार ने उनके क्षेत्र का विकास करवाना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि लोगों की मांगों को पुरजोर उठाया गया है।
कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र भारद्वाज का कहना है कि स्थानीय विधायक क्षेत्र का विकास करवाने में पूरी तरह असफल रहे। तरेला नाले में पुल तक का निर्माण विधायक नहीं करवा पाए।