अमर उजाला ब्यूरो
तीसा (चंबा)। क्षेत्र में बारिश होने से चुराह में बागवानों के चेहरे मुरझा गए हैं। बागवानों को तापमान में आ रहे बदलाव से सेब की फसल की चिंता सताने लगी है। क्योंकि इन दिनों सेब के पौधों पर फ्लावरिंग हो रही है। ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि सेब के फूलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे आने वाले समय में फसल पर भी विपरीत असर देखने को मिलेगा। यही वजह है कि मौसम की बेरुखी को देख बागवानों की चिंता बढ़ गई है। सर्दियों में भारी बर्फबारी होने से बागवानों के सेब के बगीचों को काफी क्षति पहुंची।
बर्फबारी के बाद बागवानों को आस थी कि अब उनकी सेब की फसल की पैदावार अच्छी होगी। क्योंकि बर्फबारी सेब की फसल के लिए फायदेमंद मानी जाती है। मगर फ्लावरिंग के दौरान बारिश और ओलावृष्टि से बागवानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। अगर बारिश का क्रम बंद न हुआ, तो बागवानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि चुराह के बागवानों की आय सेब की फसल पर निर्भर रहती है।
तीसा के चांजू, बैरागढ़, सकलोगा, मंगली, हिमगिरी, जुनास, हरतवास, जुआरी, सेईकोठी और देवी कोठी समेत अन्य क्षेत्रों में बागवान सेब की पैदावार करते हैं। बागवान परस राम, विजय कुमार, नंदलाल, मान सिंह, देवी सिंह, रूपलाल, मदन, राकेश और दुनी चंद ने बताया कि बार-बार हो रही बारिश से उन्हें सेब की फसल की चिंता सताने लगी है।
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उद्यान प्रसार अधिकारी अलयक्ष पठानिया ने बताया कि फ्लावरिंग के समय भारी बारिश और ओलावृष्टि होने से सेब की फसल को नुकसान हो सकता है। बारिश और ओलावृष्टि होने से सेब के पौधों पर आने वाले फूल झड़ जाते हैं।