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जलस्रोतों में घटा 15 से 20 फीसदी पानी

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चंबा। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में ही भीषण गर्मी से लोग बेहाल होने लगे हैं। बढ़ती गर्मी के कारण पहाड़ियों पर गिरी बर्फ भी समय से पहले ही पिघल गई है नतीजतन, अब चुराह घाटी में जलसंकट गहरा सकता है। वर्तमान में चुराह घाटी के प्राकृतिक जलस्रोतों में 15 से 20 प्रतिशत तक पानी का स्तर कम हो गया है। ऐसे में यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है तो क्षेत्र में पानी के अभाव में हाहाकार मच सकता है। अधिकारी पेयजल की समस्या से निपटने के लिए यथासंभव हैंडपंप स्थापित करने और टैंकरों की व्यवस्था की बात कह रहे हैं।
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चुराह घाटी की 55 पंचायतों में शामिल ग्राम पंचायत तीसा, तीसा द्वितीय, भंजराडू, खुशनगरी, पद्दर, जुंगरा, खजुआ, बिहाली, सेईकोठी, हरतवास, कुठेड़, बुदौड़ा, झझाकोठी, सनवाल, आयल, बणतंर, सतियास, बैरागढ़, बौंदेड़ी, देवीकोठी, गुडेई, थल्ली, चिल्ली, सतियौआ, टिकरीगढ़, देहरोग, बघेई, चांजू, चरड़ा, देहरा आदि की पौने दो लाख की आबादी है। यहां के ग्रामीणों को पेयजल मुहैया करवाने के लिए जलशक्ति विभाग की ओर से विभिन्न पेयजल योजनाएं संचालित की गई हैं लेकिन, इस बार समय से पहले गर्मी बढ़ने से प्राकृतिक जलस्रोतों में पानी सूखना आरंभ हो गया है। प्राकृतिक जलस्रोत में घट रहा जलस्तर विभाग की चिंताएं बढ़ा रहा है।
चुराह घाटी के लेसुई और शिकारी गांव में पानी की समस्या से ग्रामीण जूझ चुके हैं हालांकि, विभाग ने समस्या का अपने स्तर पर समाधान तो करवा दिया है लेकिन, आगामी दिनों में यह समस्या और भी विकराल रूप धारण कर सकती है।
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खेतों में सूखने लगी गेहूं और जौ की फसल
गर्मी बढ़ने से खेतों में बीजी गई गेहूं और जौ की फसल सूखने लगी है। इसके अलावा सब्जियों की पनीरी भी प्रभावित हो रही है। खेतों में बीजी गई फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं। किसान राजीव कुमार, हरीश कुमार, कपिल कुमार, प्रमोद कुमार और नरेश कुमार ने प्रशासन और संबंधित विभाग से समय रहते उनकी मदद करने की मांग की है।
जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता केवल शर्मा ने कहा कि बारिश हो जाती है तो इससे समस्या हल हो सकती है। जलस्रोतों में और पानी सूखता है तो हैंडपंप स्थापित करेंगे और टैंकरों की व्यवस्था भी की जा सकती है।
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