सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में राज्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी थानों के प्रवेश और निकास बिंदु ,पुलिस स्टेशन का मुख्य द्वार, सभी लॉकअप, लॉबी, सभी बरामदे, सब इंस्पेक्टर का कमरा, लॉकअप रूम के बाहर का क्षेत्र, पुलिस स्टेशन के परिसर के सामने, शौचालय और पुलिस स्टेशन का पिछला हिस्से को कैमरे से कवर करना होगा। इसके साथ ही जिला स्तरीय निरीक्षण समिति को सीसीटीवी और उसके उपकरणों का पर्यवेक्षण, रखरखाव की जिम्मेदारी होगी। सीसीटीवी की मरम्मत इसके उपकरणों की कार्य प्रणाली के बारे में एसएलओसी को मासिक रिपोर्ट भेजना और विभिन्न पुलिस स्टेशनों में लगे सीसीटीवी से संग्रहित फुटेज की समीक्षा करना ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई मानवाधिकारों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है,जो हुआ हो और जिसकी रिपोर्ट नहीं की गई हो।
अदालत ने कहा है कि एसएलओसी का पहला कार्य सीसीटीवी और उसके उपकरणों की खरीद, वितरण और स्थापना करना होगा। दूसरा इसके लिए बजट का प्रावधान करना। तीसरा कैमरे और उसके उपकरणों की निरंतर निगरानी और मरम्मत। चौथा, जो कैमरे बंद पड़े है उनका निरीक्षण समय पर करना और जिन के उपकरण खराब पड़े हैं, उसे ठीक करना होगा। पांचवां डीएलओसी की ओर से भेजी गई मासिक रिपोर्ट में शिकायतों का समाधान करना। छठा डीएलओसी से मासिक रिपोर्ट मंगाएं और खराब पड़े उपकरणों का निपटारा अतिशीघ्र करें। अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश मनीकटाला के प्रयासों की भी सरहाना की है, जिन्होंने इतने महत्वपूर्ण समस्या को अदालत के समक्ष लाया।