हिमाचल में देहदान करने के इच्छुक एक पूर्व सैनिक के सामने व्यवस्था ने मुश्किल खड़ी कर दी है। आईजीएमसी प्रबंधन के अनोखा तर्क से पूर्व सैनिक आहत है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरने के बाद उनके पार्थिव शरीर को परिजन शिमला तक पहुंचाएं।
देहदानी का कहना है कि मातम की उस घड़ी में उनके परिजन ऐसा करने में असमर्थ होंगे। आईजीएमसी से उनके गांव डगशाई की दूरी लगभग 65 किमी. है।
व्यवस्था के इस फेर में मामला उलझकर रह गया है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि देहदानी का यह सुझाव बेहतर है। इस पर अमल करने का प्रयास किया जाएगा।
1971 के भारत-पाक युद्ध में स्वेच्छा से रणक्षेत्र में उतरने वाले मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस के प्रशासनिक अधिकारी और समर सेवा मेडल प्राप्त जेएस संधू (76) ने मरणोपरांत देहदान की आईजीएमसी शिमला में इच्छा जताई है।
डगशाई निवासी बुजुर्ग 8 मई को इस संबंध में आईजीएमसी प्रबंधन से मिले तो उनकी इस मांग को यह कहकर दरकिनार कर दिया कि इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है। मरने के बाद परिजनों को ही देह आईजीएमसी तक पहुंचानी होगी।
उन्होंने सीएम वीरभद्र सिंह और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह से इस विषय में कोई नीति बनाने की मांग की है, जिससे की घर से संबंधित अस्पताल उनकी देह को उठाए।
स्पेशल केस में करेंगे मांग पूरी: डॉ. रमेश
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश ने कहा कि बुधवार को जेएस संधू उनके पास आए थे। उन्होंने कहा कि स्पेशल केस मानते हुए कोशिश की जाएगी कि मरने के बाद उनके पार्थिव शरीर को डगशाई से उठाया जाए।