एमएसीटी घुमारवीं का फैसला, बीमा कंपनी को भुगतान के निर्देश
7.5 प्रतिशत ब्याज सहित मिलेगी राशि, चालक की लापरवाही साबित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सड़क हादसे में युवक की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) घुमारवीं ने फैसला सुनाते हुए मृतक के परिजनों को 14,17,624 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। यह राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित याचिका दायर करने की तिथि से अदा करनी होगी।
अधिकरण के अध्यक्ष डॉ. मोहित बंसल ने मृतक की मां राम प्यारी और भाई अमित कुमार निवासी गांव चुराड़ी, डाकघर हावण, तहसील घुमारवीं की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने युवक की मौत पर 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। याचिका के अनुसार 23 मार्च 2018 को अनिल कुमार बड्डी (झाड़माजरी) स्थित एक अस्पताल में कैंटीन मैनेजर के रूप में नई नौकरी ज्वाइन करने जा रहा था। रास्ते में बिलासपुर के छड़ोल में बस से उतरकर चाय-नाश्ता करने लगा। इसी दौरान तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रहे ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने थाना सदर बिलासपुर में मामला दर्ज कर जांच शुरू की और चालक के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान प्रत्यक्षदर्शी गवाह ने अदालत में बयान दिया कि ट्रक तेज गति और लापरवाही से चलाया जा रहा था और उसने सड़क किनारे खड़े अनिल कुमार को टक्कर मारी। अदालत ने गवाह के बयान और पुलिस जांच को विश्वसनीय मानते हुए दुर्घटना के लिए चालक को दोषी ठहराया।
परिजनों ने दावा किया था कि मृतक 25-30 हजार रुपये मासिक कमा रहा था, लेकिन इसका ठोस दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किया जा सका। ऐसे में अधिकरण ने न्यूनतम वेतन के आधार पर आय 6810 रुपये प्रतिमाह मानी। इसमें 40 प्रतिशत भविष्य की आय जोड़ते हुए कुल आय 9534 रुपये आंकी गई। मृतक अविवाहित था, इसलिए एक-तिहाई राशि व्यक्तिगत खर्च के रूप में घटाई गई। इसके बाद शेष आय पर 17 का गुणा लागू कर निर्भरता हानि 12,96,624 रुपये निर्धारित की गई। अदालत ने अंतिम संस्कार और संपत्ति हानि के लिए 16,500-16,500 रुपये तथा दोनों याचिकाकर्ताओं को 44-44 हजार रुपये पारिवारिक स्नेह (कंसोर्टियम) के रूप में प्रदान किए। इस प्रकार कुल मुआवजा 14,17,624 रुपये तय किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वाहन चालक और मालिक संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं, लेकिन वाहन बीमित था और चालक के पास वैध लाइसेंस था, इसलिए बीमा कंपनी को पूरी राशि जमा करनी होगी। अधिकरण ने निर्देश दिए कि मुआवजा राशि मृतक की माता और भाई के बीच समान रूप से बांटी जाएगी। साथ ही यदि कोई अंतरिम राहत दी गई है तो उसे अंतिम मुआवजे में समायोजित किया जाएगा।