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प्रथम श्रेणी के साहित्यकार हैं यशपाल : डॉ. पंकज

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बिलासपुर के भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय यशपाल जयंती समारोह में उपस्थित
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राज्य स्तरीय यशपाल जयंती का समापन, दूसरे दिन कवि सम्मेलन का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राज्य स्तरीय यशपाल जयंती का समारोह का सोमवार को समापन हुआ। दो दिवसीय समारोह का भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से बहुउद्देशीय सांस्कृतिक भवन में आयोजन किया गया।
समापन समारोह में भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। डॉ. पंकज ललित ने कहा कि विभाग का हमेशा प्रयास रहता है कि वह प्रदेश के लेखकों, कवियों और साहित्यकारों को आमंत्रित करते रहें ताकि सभी को मंच मिल सके। इस प्रकार की जयंतियां भी विभाग हर जिला में मनाने की कोशिश करता है।
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उन्होंने कहा कि यशपाल पहली श्रेणी के साहित्यकार रहे हैं। तभी विभाग उनकी जयंती मनाता है। समारोह के दूसरे दिन कवि सम्मेलन हुआ। कवि सम्मेलन में स्व. यशपाल की भतीजी गोगी सरोज पाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. अनीता शर्मा ने की। कवि सम्मेलन में जिले के डॉ. रविंदर ठाकुर, अरुण डोगरा, रविंदर चंदेल, रविंदर शर्मा, जय महलवाल, अरुण डोगरा, डॉ. अनीता शर्मा, मीना चंदेल, प्रीती शर्मा, कुलदीप चंदेल, रत्तन चंद निर्झर, डॉ. प्रशांत आचार्य, शीला सिंह, संदेश शर्मा, रविंद्र भट्टा समेत 40 साहित्यकारों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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बिलासपुर की संस्कृति के संरक्षण में लोक कलाकारों ने लोकनाट्य धाजा प्रस्तुत किया। मंच का संचालन रविंद्र शर्मा ने किया। उन्होंने कम से कम 200 कहानियां लिखी हैं। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने साहित्यकारों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर गोगी सरोज पाल, डॉ. हेमराज कौशिक और विभाग की भाषा अधिकारी सरोजना नरवाल, संतोष कुमार, कैशियर विपिन कुमार, इंद्र सिंह चंदेल और अन्य लोग उपस्थित रहे।
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