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Bilaspur News: बस रूट बंद करने के विरोध में मातृशक्ति एकजुट

Fri, 27 Feb 2026 05:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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सवारियों से भरी चंदपुर-सिकरोहा-नम्होल होकर बिलासपुर बस। संवाद
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चंदपुर-सिकरोहा-नम्होल होकर बिलासपुर रूट बंद हुआ तो करेंगे घेराव
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सरकारी बस बंद होने से छात्रों, महिलाओं और मरीजों की सुविधा होगी प्रभावित

संवाद न्यूज एजेंसी
मलोखर(बिलासपुर)। चंदपुर-सिकरोहा-नम्होल होकर बिलासपुर जाने वाली सरकारी बस सेवा को घाटे का रूट बताकर बंद किए जाने की चर्चाओं के बीच क्षेत्र की महिलाओं, युवक मंडलों और स्थानीय संगठनों में रोष है। सिकरोहा पंचायत के गाउटा गांव में मातृशक्ति ने बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि यह रूट बंद किया गया तो प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का घेराव किया जाएगा।
महिलाओं का कहना है कि सुबह चलने वाली यह बस बच्चों को स्कूल–कॉलेज पहुंचाने के साथ मरीजों को एम्स और बिलासपुर अस्पताल तक ले जाने का मुख्य साधन है। यदि इसका रूट बदला गया या सेवा बंद की गई तो क्षेत्र के हजारों लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी। महिलाओं ने कहा कि रूट को घाटे का बताकर सेवा बंद करना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नम्होल उप तहसील को आठ पटवार सर्किलों से जोड़ने के लिए कम से कम तीन बसें चलाई जानी चाहिए, जबकि मौजूदा एकमात्र महत्वपूर्ण बस सेवा को भी बंद करने की तैयारी की जा रही है। विनीता देवी, जय देवी, सीमा देवी, रामकली, निर्मला देवी, पार्वती देवी, संतोषी देवी, मीना देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने निर्णय वापस नहीं लिया तो नम्होल और बिलासपुर में चक्का जाम तक किया जाएगा। बताया गया कि वर्ष 2015 में स्थानीय युवाओं में ओम प्रकाश शर्मा (बंटी) की अगुवाई में विभिन्न कार्यालयों में निवेदन कर इस बस सुविधा की मांग उठाई थी। इसके बाद मार्च 2016 में यह बस सेवा शुरू हो पाई थी। अली खड्ड पानी बचाओ संघर्ष समिति त्रिवेणी घाट के उपाध्यक्ष राम शर्मा, सचिव गीता राम नड्डा और मुख्य सलाहकार जितेंद्र शर्मा ने कहा कि यदि रूट बंद किया गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
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चांदपुर, सिकरोहा, संमोग, सिलला, साई नोडवां, गाउटा और राजघाटी में सुबह बस के समय पहुंचे छात्रों और लोगों का कहना है कि बस में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और कर्मचारी सफर करते हैं, इसलिए इसे घाटे का रूट बताना उचित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले नम्होल उप तहसील नहीं था, लेकिन अब उप तहसील बनने के बाद लगभग आठ पटवार सर्किलों के करीब 15 हजार लोग इसी रूट से नम्होल, जुखाला और एम्स से जुड़ते हैं। दिन के समय अन्य परिवहन सुविधा न होने से सुंई, सुरहाड़-भोली-दिगथली, साई खारसी और रानीकोटला क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे आकर बस सेवा बहाल रखने और दो से तीन नई बसें शुरू करवाने की मांग उठाने की अपील की है।
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